बैंक लूट की घटना में उठ रहे हैं कई सवाल

काफी दिनों से खराब था सीसीटीवी व हॉर्न,

1988 से औरंगाबाद पटना मुख्य पथ पर चल रहा है बैंक ,

एक अपराधी की हुई है पहचान:

अपराधियों के भागने के रूट  का लगाया जा रहा पता:

(फॉलोअप)

औरंगाबाद पथ के जिनोरिया स्थित इंडियन बैंक की शाखा में अज्ञात लुटेरों द्वारा 69 लाख 63 हजार 990 रुपये हथियार के बल पर लूट लिए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। गुरुवार को प्रतिदिन की तरह बैंक खुला, सभी कर्मी काम पर लग गए थे, सात आठ के संख्या में ग्राहक भी पहुंचे हुए थे।तभी  तकरीबन 10:30  तीन बाइक पर सवार आठ-नौ की संख्या में अपराधियों ने बैंक में प्रवेश कर गए। अंदर आते ही गार्ड अनुग्रह नारायण सिंह से भिड़ गए।गार्ड को चाकू मारकर घायल कर दिया । साथ ही गार्ड के रायफल व गोली को क्षतिग्रस्त कर दिया।इसके बाद हथियार के बल पर सभी बैंक कर्मियों को अपने कब्जे में ले लिया।कैश काउंटर से रुपए लूटने के बाद सभी बैंक कर्मियों को अपने कब्जे में लेकर चेस्ट खुलवा कर उसमें रखे रुपए को लूट लिया।घटना के समय बैंक में  करीब आधा दर्जन की संख्या में ग्राहक भी थे,जिन्हें किचन में बंद कर दिया गया ।घटना को अंजाम देने के बाद लुटेरे रुपए लेकर दाउदनगर की ओर भागने में सफल हो  गए।जख्मी गार्ड का इलाज स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया।
ग्रामीण ने किया हल्ला:
बैंक में काम से गए एक दूसरे ग्राहक ने जब लुटेरे और गार्ड में हाथापायी की घटना को देखा तो उसने जिनोरिया गांव में जाकर हल्ला किया ।जब तक ग्रामीण जुटते,तब तक लुटेरे लूट की इस घटना को अंजाम देकर भागने में सफल हो गए।घटना के बाद ग्रामीणों ने दाउदनगर पुलिस पर फोन नहीं उठाने और देर से आने का आरोप लगाते हुए करीब 15 मिनट तक सड़क भी जाम कर दिया। एसडीपीओ राजकुमार तिवारी एवं थानाध्यक्ष राजकुमार ने पहुंचकर ग्रामीणों को समझा-बुझाकर सड़क जाम को समाप्त किया और बैंक परिसर की जांच की ।घटना की सूचना पर एसपी पंकज कुमार बैंक परिसर में पहुंचे और उन्होंने काफी देर तक बैंक कर्मियों से पूछताछ किया।घटनास्थल का मुआयना किया।

एक अपराधी की हुई है पहचान:

एसपी ने बताया कि तीन बाइक पर सवार सात- आठ की संख्या में अपराधियों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया है।करीब 69 लाख रुपये की लूट होने की बात शाखा प्रबंधक द्वारा बतायी गयी है।पुलिस द्वारा कार्रवाई व छापेमारी की जा रही है ।एक अपराधी की पहचान हो चुकी है।अपराधियों की गिरफ्तारी व पहचान के लिए छापेमारी की जा रही है।

रिटायर्ड आर्मी है सुरक्षा गार्ड :

बैंक के  घायल सुरक्षा गार्ड अनुग्रह नारायण सिंह दाउदनगर प्रखंड के चौरम गांव के निवासी हैं  उनकी पत्नी कुसुम देवी अंछा पंचायत के उप मुखिया हैं।वे सेना के रिटायर्ड जवान हैं और वर्ष 2015 से वे बैंक में गार्ड के पद पर कार्य कर रहे हैं।ग्रामीणों ने बताया कि बहुत पहले सुनते हैं कि इस बैंक को लूटने का असफल प्रयास किया गया था, लेकिन अपराधियों का प्रयास सफल नहीं हो सका था।कभी एक व्यक्ति का आते या  जाते समय रास्ते में पैसा लूटा गया था ,लेकिन उसके बाद कभी ऐसी घटना सुनने को नहीं मिली।

बैंक के सीसीटीवी है खराब:

बताया जाता है कि बैंक में लगे सीसीटीवी काफी दिनों से खराब है ।महत्वपूर्ण बैंक में सीसीटीवी का खराब होना सवाल खड़ा करता है।आखिर इसे ठीक क्यों नही करवाया जा रहा था,हालांकि बैंक मैनेजर का कहना है कि सिर्फ डिस्क खराब है ।हॉर्न भी खराब है ,अगर हॉर्न सही रहता तो हॉर्न बजते के साथ लोग सचेत हो जाते, समझ जाते की  बैंक में कुछ हुआ है,हो सकता था कि ग्रामीणों के जुटने पर कुछ अपराधी हाथ लग सकते थे।

अपराधी किस तरफ गए इसका  लगाया जा रहा पता:

अपराधी बाइक  से सवार थे। वे अगर दाउदनगर के तरफ गए तो हो सकता है तरारी मोड़ से नहर रोड पकड़ लिए हो।क्योंकि भखरुआं मोड़ पर कई दिनों से बाइक चैंकिंग चल रही है।ट्रिपल लोडिंग वाहनों को देखते के साथ रुकवाया जा रहा है,इसी से अन्दाज़ा लगाया जा  रहा है कि  रास्ता बदल के अपराधी भागे होंगे। पुलिस तहकीकात में जुट गई। अपराधियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है।

1988 से औरंगाबाद पटना मुख्य पथ पर चल रहा है बैंक:

यह बैंक 1985 में जिनोरिया  गांव में शुरू किया गया था , उसके बाद 1988 से  औरंगाबाद मुख्य पथ पर  खोला गया। बताया जाता है इस बैंक को इलाहाबाद बैंक से  मच कर दिया गया है ,यह अब कोर बैंक बन गया है।महत्ता को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाए जाने की आवश्कता है। बताया जाता है कि कई पंचायत सेवको का खाता यहीं है।

90 के दशक में  बैंक ऑफ बड़ौदा में हुई थी लूट:

दाउदनगर में इतनी बड़ी रकम की लूट चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि इससे पहले 90 के दशक में  दाउदनगर के सिनेमा रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में लूट हुई थी।उस समय भागने के दौरान अपराधियो द्वारा एक ग्रामीण की हत्या भी हुई थी ,वही पुलिस की मुठभेड़ में एक   लुटेरा भी मारा गया  था।

बड़ा सवाल:

इंडियन बैंक को पांच लाख रूपये केश रखने की क्षमता है तो फिर 69 लाख रुपए महीनों से क्यों रखा हुआ था।

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