परंपरा पूर्वक मनाया गया कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार


कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार आस्था एवं परंपरा पूर्वक मनाया गया।श्रद्धालुओं ने सोन नदी तट व पुनपुन में स्नान किया।घरों में कार्तिक पूर्णिमा का हवन हुआ।देवताओं की दीपावली मनाई गई।श्रद्धालुओं ने चार बजे सुबह से ही दाउदनगर के सोन नदी के तट पर पहुंचने लगे थे।श्रद्धालुओ ने स्नान कर पूजा अर्चना की। पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा ।सोन नदी के काली स्थान घाट की ओर एवं सोन पुल घाट की ओर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सोनतटीय इलाकों के सोन नदी में स्नान करने के लिए महिला पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।सोनतटीय क्षेत्र के बाबा भूतनाथ मंदिर परिसर के पास प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेला का आयोजन किया गया ,जिसमें काफी संख्या में लोगों ने पहुंचकर मेला का आनंद लिया।श्रद्धालुओं ने मेला में पहुंचकर वहां स्थित सूर्य मंदिर, बाबा भूतनाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर एवं काली मां के मंदिर में पूजा अर्चना किया।पूजा अर्चना करने के बाद मेला का आनंद लिया।शाम तक मेला में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।विदित हो कि कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन स्नान और दीपदान करने का पौराणिक महत्व है।इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती ,हवन और दान का बहुत ही महत्व है ।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से सुख समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
भृगुरारी धाम पर उमड़ी भीड़:
पुण्य सलिला पुनपुन एवं मदार संगम तट पर कार्तिक पूर्णिमा के गंगा स्नान व दान पर्व के पावन मौके पर लाखों आस्थावान नर नारियों,बच्चो वृधो ने आदि गंगा पुनपुन में हर हर महादेव का गगन भेदी उदघोष करते हुए आस्था (पुण्य) की डुबकी लगाई ।इस दौरान लोगो ने पवित्र संगम की जलधारा में दीप प्रज्वलित कर प्रवाहित किया,तथा मां नकटी भवानी के मंदिर में जाकर दर्शन एवं पूजन किया।साथ ही सुरम्य पहाड़ी पर स्थित महृषि भृग ऋषि के अति प्राचीन आश्रम का भी श्रद्धालुओ ने पावन दर्शन किया

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