देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिवस पर युवा परिषद् ने उन्हें याद किया

संतोष अमन की रिपोर्ट:

आज दिनांक 3 दिसंबर 2016 को युवा परिषद्, ओबरा के द्वारा भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिवस पर उन्हें याद कर उनके बारे में चर्चा की गई। युवा परिषद् के अध्यक्ष आकाश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इसकी सूचना दी है। बिहार के सिवान जिला के जीरादेई ग्राम में 3 दिसंबर 1884 को जन्मे डॉ राजेंद्र प्रसाद बचपन से ही पढाई लिखाई में बहुत तेज थे। उनके पिता महादेव सहाय उस ज़माने में संस्कृत और फ़ारसी के विद्वान थे। डॉ प्रसाद की शुरुआती पढाई एक मौलवी के द्वारा की गई जहाँ उन्होंने खासकर फ़ारसी, हिंदी और गणित सीखा। महज 12 वर्ष की उम्र में उनकी शादी हुई बावजूद इसके उन्होंने अपनी पढाई को जारी रखा और पटना से लेकर कलकत्ता तक अपने क़ाबलियत का लोहा हर किसी को मनवाया। कलकत्ता विश्वविद्यालय में उन्हें उस ज़माने में 30 रूपये महीने की छात्रवृति दी गई।

बिहार का मान सम्मान बढ़ाने का काम डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया और भारतीय इतिहास में देश के सरवोच्च पद संभाल कर बिहारियों को गौरान्वित किया है। सन् 1962 में उन्हें उनके बेहतर काम, देश को दिए गए योगदान और क़ाबलियत पर भारत रत्न से नवाजा गया। अफ़सोस भारत रत्न सम्मान के दूसरे वर्ष ही 78 वर्ष की आयु में 28 फ़रवरी 1963 को दुनिया को विदा कर गए

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने भारतीय संविधान निर्माण में डॉ भीम राव अंबडेकर के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर अहम् भूमिका निभाई। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। युवा परिषद परिवार भारत के प्रथम राष्ट्रपति को उनके जन्मदिन पर श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

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