
उर्दू भारत की मिट्टी में पली-बढ़ी गंगा जमुनी संस्कृति की प्रतीक है, लेकिन यह द्वितीय राजभाषा आज बैकफुट पर जा रही है। कोई भी संस्कृति और भाषा तब तक कायम रहती है, जब उसके चाहने वाले उसे आगे बढ़ाएं व आम लोगों की जुबान की भाषा बने।जिस मुल्क में उर्दू का जन्म हुआ, वहां ही यह कमजोर पड़ रही है। उर्दू सिर्फ जुबां ही नहीं, बल्कि तहजीब से भी ताल्लुक रखती है।उक्त बातें
प्रखंड विकास पदाधिकारी जफर इमाम ने उर्दू निदेशालय के निर्देशानुसार दाउदनगर प्रखंड कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित फरोग ए उर्दू कार्यक्रम में उर्दू भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कही। कार्यक्रम में द्वितीय राजभाषा उर्दू के कार्यांवयन एवं प्रचार-प्रसार से संबंधित समीक्षा की गई तथा उर्दू भाषा पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने उर्दू की तरक्की पर बल देते हुए कहा कि उर्दू शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वाहन करना चाहिए। उपस्थित सभी लोगों ने भाषा के उत्थान के लिए सार्थक पहल करने का संकल्प लिया ।संचालन करते हुए प्रधानाध्यापक मो. परवेज आलम ने उर्दू के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रखंड कार्यालय के उर्दू अनुवादक नूर जमा खां, शिक्षक रेयाजुल हसन, मौलाना फरीदुद्दीन, मौलाना मतलूब, बीआरपी ऐनुल हक समेत प्रखंड के उर्दू शिक्षक एवं उर्दू के जानकार उपस्थित हुए और उर्दू के विकास पर विचार विमर्श किया गया।