कौमी एकता कवि सम्मेलन सह मुशायरा का हुआ आयोजन


घाटियां खुद पिघल गई होंगी छूके बलिदानियों के सीने को……
बरसी अंगार त पहाड़ ढहराई रे माई तोरे अंगना तिरंगा लहराई रे..” जब यह दोनो पंक्तियां विख्यात कवि एवं उद्घोषक शंकर कैमूरी ने कहा तो उपस्थित लोंगो ने वाह वाह करते हुए जमकर ताली बजाई।यह मौका था अनुमंडल प्रशासन द्वारा प्रखंड कार्यालय परिसर में शनिवार की रात आयोजित”एक शाम शहीदों के नाम कौमी एकता कवि सम्मेलन सह मुशायरा” का, जिसका संचालन शंकर कैमूरी कर रहे थे ।कवि सम्मेलन सह मुशायरा का उद्घाटन एसडीओ अनीस अख्तर, एसडीपीओ राजकुमार तिवारी, डीसीएलआर राहुल कुमार, अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी तेज नारायण राय, बीडीओ जफर इमाम तथा गोह एवं हसपुरा बीडीओ समेत सभी कवियों एवं शायरों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।उदघाटन का संचालन खुर्शीद खान ने किया।दो मिनट का मौन रखकर पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवानों को
उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।मोमबत्ती जलाकर एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान” वंदे मातरम, भारत माता की जय” के जय घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।शंकर कैमूरी ने किया आगाज- कौमी एकता कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आगाज शंकर कैमूरी ने देश भक्ति शायरी से की ।उन्होंने कहा-“घाटियां खुद पिघल गई होंगी, छूके बलिदानियों के सीने को…” कवयित्री अर्चना अर्चन ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।आजमगढ़ से पहुंचे हाफिज अहमद आजमी ने देश भक्ति की भावना से ओर प्रोत प्रस्तुति देते हुए कहा -हमने जिस दम जंग का एलान खाली कर दिया, दुश्मनों ने जंग का मैदान खाली कर दिया…इन्होंने जब “हम अपने पुरखों के जमाना भूल गए मेहमानों को घर पर बुलाना भूल गए, बीवी की फरमाइस पूरी करने में अपनी मां का चश्मा भूल गए..”प्रस्तुत किया तो लोग वाह-वाह करने लगे।इलाहाबाद(प्रयागराज) से आए हास्य कवि राधेश्याम भारती ने तंज कसते हुए कहा-‘कोई क्रिकेट का खेल बेच रहा है, तो कोई थाना और जेल बेच रहा है।पैसे का खेल देखो सदी का महानायक नवरत्न तेल बेच रहा है..” आलम सुल्तानपुरी ने कहा -“चमन में फूल हैं, जितने सभी से प्यार करते हैं, जहां पर गीता रखते हैं वहीं पर कुरान रखते हैं, हमारे सामने आतंक का तुम नाम मत लेना, हम अपने दिल की हर धड़कन में हिंदुस्तान रखते हैं….” औरंगाबाद जिले के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शायर आफताब राणा ने शायरी प्रस्तुति देते हुए कहा-” जख्मी दिल हमने छुपाये हैं गुनाहों की तरह और बेबसी लिपटी है महबूब की बाहों की तरह ,पढ़ने वालों की कमी मुझे रुला देती है है मेरे शहर में, कुछ लोग किताबों की तरह…..”. दाउदनगर की मिट्टी में जन्म लेकर बड़े-बड़े वर्तमान में वाराणसी में रह रहे देश के मशहूर शायर एवं लेखक डॉ. बख्तियार नवाज ने अपनी प्रस्तुति में शहीदों को समर्पित करते हुए का लहू की बूंद अजमत मांगती है, मेरी गर्दन शहादत मांगती है …”शायरी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा-‘यह अंदाजे मोहब्बत भी अजब है ,तेरी सोखी शरारत मांगती है, वक्त सबको बुरा बनाता है, आदमी कोई भी बुरा है क्या….”. कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का संचालन अध्यक्षता कर रहे हैं गाजीपुर के से आए कवि डॉ. हरिनारायण हरीश ने वीर रस की कविता प्रस्तुत की तो दिल्ली से आए हसन काजमी एवं गाजीपुर से आई संध्या तिवारी ने गजल एवं काव्य की प्रस्तुतियां दी।इस मौके पर भाजपा के जिला प्रवक्ता अश्विनी कुमार तिवारी, राजद नगर अध्यक्ष मुन्ना अजीज, इं. गुलाम रहबर आदि भी मौजूद रहे। युवाओं की टोली चन्दन कुमार,रवि कुमार,सनोज यादव,आर्य अमर भी जमकर वंदे मातरम,भारत माता की जय का उदघोष किया।

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