राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास करना चाहिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कर्मभूमि को


दाउदनगर प्रखंड के चौरम स्थित सुभाष आश्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित एक विचार गोष्ठी में उपस्थित लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।विचार गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ गोपगुट के प्रवक्ता गोपेंद्र कुमार सिंहा गौतम ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस कर्मभूमि को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए साथ ही उनके विचार धारा और दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए चौरम आश्रम की भूमि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय महाविद्यालय का निर्माण करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस वह शख्सियत थे ,जो जर्मन चांसलर हिटलर के सामने भी आंख से आंख मिलाकर बात करने में थोड़ा सा भी विचलित नहीं हुए थे।आज उनकी कर्मभूमि आश्रम वीरान पड़ा हुआ है ।यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ।इसके लिए जिला प्रशासन ,जनप्रतिनिधि एवं बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए । युवा राजद के प्रदेश सचिव अरुण कुमार यादव ने कहा कि अगले वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा तो उससे पहले चौरम आश्रम में सुभाष पार्क का निर्माण किया जाना चाहिये,जिसमें वे सहयोग करेंगे।अंछा पंचायत की मुखिया बंदना कुमारी ने कहा कि वे पार्क निर्माण के लिए अपनी तरफ से आर्थिक सहायता करेगीं। जिला प्रशासन की ओर से यहां कोई कार्यक्रम नहीं कराये जाने पर भी वक्ताओं ने नाराजगी व्यक्त की। विचार गोष्ठी का संचालन मनु कुमार ने किया।इस मौके पर महिला कॉलेज दाउदनगर के सचिव रघुवंश प्रसाद सिंह, आलोक कुमार ,अजीत कुमार, शिक्षक रामाकांत सिंह, समाजवादी नेता मोहन सिंह, युवा राजद के प्रखंड अध्यक्ष बसंत बादल ,संतोष कुमार ,धर्मेंद्र कुमार, विद्याधर तिवारी ,रामाश्रय सिंह, अधिवक्ता श्री निवास, यादव महासभा के अध्यक्ष नागेंद्र यादव आदि उपस्थित थे।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ा हुआ है दाउदनगर का इतिहास:

दाउदनगर का इतिहास नेता जी से जुड़ा हुआ है।जब 9 फ़रवरी 1939 को चौरम में चतुर्थ गया जिला राजनीतिक सम्मेलन में भाग लेने आए थे।
75 साल पुराना स्मरण अब भी स्थानीय बुजुर्गों की जेहन में हैं।सुभाष आदर्श उद्योग मंदिर चौरम दाउदनगर बारुण रोड में शहर से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित है । यहां 9-10 फरवरी 1939 को चतुर्थ गया जिला राजनीतिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें भाग लेने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तब कोलकता से यहां आए थे। इसी सम्मेलन में उन्होंने अंग्रेजों को ललकारते हुए कहा था कि वे रोज गोली चला रहे हैं, यह अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है। ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा बुलंद किया था। तब ये सम्मेलन 4 दिनों तक चला था।दो दिन नेता जी यहां रुके थे।यह वही चौरम आश्रम है जहां आजादी के दीवाने राजनीति का पाठ पढ़ अपने अंदर जज्बा और हौसला भरते थे

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