
पिन्टू कुमार आर्या की रिपोर्ट:
दाउदनगर की धरोहर कही जाने वाली जिउतिया के अवसर पर दाउदनगर नगर परिषद् द्वारा लोकोत्सव को लेकर अब तक संसय बने रहना काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ़ लोगों की यह चाह है कि इस पर्व को राजकीय दर्जा मिले। इसे लेकर लोगों ने पहल भी की है। परंतु अपने ही शहर में नगर परिषद् के नज़रों में उपेक्षित हो रहा यह जिउतिया का पर्व।
जिउतिया के मौक़े पर दूर-दूर से लोग यहाँ की कला देखने आते हैं। कलाकारों का हौंसला बढ़ता है और यही वजह है कि युवा वर्ग भी कला प्रदर्शन को सामने आते हैं। विद्यार्थी क्लब के निर्देशक चंदन कुमार कसेरा ने बताया कि दाऊदनगर के जिउतिया पर्व को सरकारी लाभ नहीं मिलने के कारण आज इसका रंग कुछ फीका पड़ गया है। जिसका सिर्फ एक ही कारण है वो है दाऊदनगर की गंदी राजनीति।
देव में देव महोत्सव, अम्बा में अम्बे महोत्सव सरकारी फण्ड द्वारा धूम धाम से मनाया जाता है। लेकिन जब यही बात दाउदनगर में जिउतिया महोत्सव कराने की आती है तब लोग गंदी राजनीति करना प्रारंभ कर देते हैं। इसके फलस्वरूप यहाँ की संस्कृति में बसी नकल प्रतियोगिता आज अधमरी के कगार पर आ चुका है। विदित हो कि वर्ष 2016 में स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र कश्यप और वार्ड 5 के प्रतिनिधि बसन्त कुमार मालाकार के पहल से मुख्य पार्षद परमानंद प्रशाद और उप मुख्य पार्षद कौशलेन्द्र सिंह के द्वारा जिउतिया लोकोत्सव कराया गया था।
दाउदनगर के लोगों और स्थानीय कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी। और उम्मीद यह किया गया था कि अब दाउदनगर के जिउतिया पर्व को राजकीय दर्जा मिल जाएगा। आगे जानकारी देते हुए श्री कसेरा ने कहा कि पुनः 2017 में इस लोकोत्सव को गन्दी राजनीति के कारण सूली पर चढ़ना पड़ा। जब 2017 में मैं ओर वार्ड पार्षद बसंत मालाकार और दाउदनगर के सभी कलाकार अनीश अख्तर से मिले तब उन्होंने पूरा भरोसा दिलाया था कि हरहाल में दाउदनगर जिउतिया लोकोत्सव कराया जाएगा। आपलोग निश्चिन्त रहे। 2017 में दाउदनगर को नगर पंचायत से नगर परिषद का दर्जा मिला था। तब चुनाव नही हुआ था और सिर्फ प्रशाशक के रूप में एस.डी.ओ. ही थे। ठीक उसी दिन विधानसभा के पूर्व सभापति से हमलोगों ने मिलकर बात किया तब उन्होंने भी बोला कि जिउतिया लोकोत्सव हर हाल में होगा । लेकिन अंततः परिणाम नही निकला और दाउदनगर के जनता और कलाकार निरास हुए।
जानकारी के मुताबिक़ नगर परिषद के बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया कि दाउदनगर जिउतिया महोत्सव नगर परिषद कराएगा। लेकिन अभी तक नगर परिषद के द्वारा असमंजस करना कही न कही कलाकारों का मनोबल तोड़ने का कार्य कर रही है। नगरवासी और कलाकार नगर परिषद से मांग करते हैं कि 2016 की तरह इस बार भी जिउतिया महोत्सव को भव्य तरीक़े से आयोजित किया जाए ताकि जिउतिया महापर्व को संरक्षण देकर राजकीय दर्जा दिलाने में मदद हो सके।
श्री कसेरा ने जानकारी देते हुए कहा कि अगर नगर परिषद नकल अभिनय प्रतियोगिता के लिए मंच नही देता है तो दाउदनगर के सभी कलाकार एवं जनता मिलकर एक बहुत बड़ा आंदोलन करेगी, जिसका जवाबदेही सिर्फ और सिर्फ दाउदनगर नगर परिषद होगा।