चिकित्सको की लापरवाही से गई महिला की जान

कई सरकारी दावों होने के बावजूद फर्जी क्लिनिकों एवं तथाकथि डॉक्टरों(फर्जी भी हो सकते हैं) की मनमानी नही रुक रहा है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन या आवश्यक व्यवस्थाएं के ही आये दिन निजी नर्सिंग होम खुलते जा रहे हैं।जहां भोले भाले मरीज से आर्थिक शोषण किया जाता है।कभी-कभी स्थिति यह हो जाती है कि मरीज को मौत के गाल में समा जाते हैं। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को दाउदनगर में प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार, दाउदनगर शहर के वार्ड संख्या 10 निवासी 22 वर्षीय लक्ष्मी देवी को पटना के फाटक के पास स्थित शारदे हॉस्पिटल में परिजनों द्वारा भर्ती कराया गया था।परिजनों का कहना है कि वह गर्भवती थी और उसे लगातार ब्लड आ रहा था। जिसके कारण उक्त निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया।शुक्रवार की सुबह अस्पताल के डॉ. मनोज कुमार सिंह द्वारा उसका ऑपरेशन किया गया ।ऑपरेशन के बाद अचानक उसकी हालत गंभीर बताते हुए उसे आनन- फानन में नारायण मेडिकल कॉलेज जमुहार ले जाने के लिए कहा गया। परिजनों का कहना है कि उक्त निजी हॉस्पिटल द्वारा ही एंबुलेंस भी दे दिया गया। लेकिन चौरम जाते-जाते पता चला कि उसकी मौत पहले ही हो चुकी है।परिजन शव को लेकर अपने घर वापस आ गए. जैसे ही इसकी सूचना तांती समाज के लोगों को मिली तो काफी संख्या में लोग पहुंच गए ।पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण प्रसाद तांती, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि प्रशांत कुमार, भाजपा बुनकर प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मुरारी प्रसाद तांती समेत अन्य लोगों ने पहुंच कर इस घटना की निंदा की।नारायण प्रसाद तांती एवं प्रशांत कुमार ने कहा कि शहर में आए दिन निजी क्लीनिकों की संख्या बढ़ती जा रही है ।जहां न किसी प्रकार की व्यवस्था है और न ही चिकित्सकों के पास योग्यता ।बड़े-बड़े डॉक्टरों का बोर्ड लगा कर मरीजों का शोषण किया जाता है।प्रशासन को चाहिए कि अभियान चलाकर निजी क्लीनिकों एवं फर्जी डॉक्टरों पर रोक लगाए।इधर,मृतका के पति समेत अन्य परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल था
परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही से लक्ष्मी देवी की मौत हुई है घटना के बाद तथाकथित डॉक्टर द्वारा मैनेज करने का प्रयास भी किया गया।सूत्रों के अनुसार, देर शाम तक सूचना मिली कि दोनों पक्षों के बीच समझौता भी करने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर ,यह स्थिति देखी गई कि घटना के बाद निजी नर्सिंग होम का बोर्ड तक उतार लिया गया था।लोगों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि उक्त नर्सिंग होम रजिस्टर्ड था या नहीं।
सूत्रों के अनुसार यह प्रयास जारी था ।इस संबंध में जब उक्त नर्सिंग होम के पुर्जे पर लिखे नंबर पर चिकित्सक का पक्ष लेने के लिए जब संपर्क स्थापित किया गया तो मोबाइल किसी कंपाउंडर ने उठाया ,जिसके द्वारा कहा गया कि डॉक्टर साहब अभी नहीं है।

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