
हमारे देश भारत में कई संस्कृतियों का मेल है, सभी संस्कृतियों की अपनी मान्यतायें हैं बावजूद इसके सभी का मकसद प्रेम और करुणा ही है। बस निभाने का तरीका अलग-अलग है। इसलिए भारत में कई त्यौहार मनायें जाते हैं, कई नव-वर्ष मनाये जाते हैं साथ ही एक से अधिक कैलेंडर भी हमारे देश में होते हैं। सभी धर्मों के अपने अलग-अलग महीने होते हैं, जिनमें कई परम्पराओं के साथ अलग-अलग मान्यतायें भी शामिल होती हैं लेकिन सभी का उद्देश्य ख़ुशी औए एकता ही होता है।
ऐसे ही रमज़ान का अपना एक महत्व होता है, भारत में भी मुस्लिम सभ्यता है। यहाँ भी रमज़ान बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

ईस्लाम की पांच स्तंभों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर (तय) किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इंसान के अंदर जिस्म और रूह हैं। आम दिनों में इंसान का पूरा ध्यान खाना-पीना और दूसरे जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है और इसी को अध्यात्मिक और पवित्र बनाने के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है और यही रमजान माह की विशेषता भी है।
रमजान माह के दौरान हर नेकी का सवाब सत्तर गुना ज्यादा मिलता है। साथ ही इस माह में जहन्नम (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं। इसी महीने में पवित्र कुरान दुनिया में नाजिल (अवतरित) हुआ था जो सारे जहाँ के लोगों के लिए निज़ात का ज़रिया है।
आत्मा को पाकीजगी का मौका देता है रमजान
बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाले पाक महीने रमजान की रूहानी चमक से दुनिया एक बार फिर रोशन हो चुकी है और फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते लाखों हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे को शिद्दत दे रहे हैं।

ज्ञात हो की तीस दिनों के रमजान माह को 3 अशरों (खंडों) में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘बरकत’ का है जिसमें खुदा अपने बंदो पर बरकत नाजिल करता है जबकि तीसरा अशरा ‘मगफिरत’ (माफ़ी) का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है।
आज का इंसान बेहद खुदगर्ज हो चुका है लेकिन रोजे में वह ताकत है, जो व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। ज़कात, सदक़ा और फितरा के माध्यम से गरीब-असहाय लोगों को आर्थिक मदद पहुँचाया जाता है। रमजान माह के रोजे बंदे को आत्मावलोकन का मौका देतीे है। अगर इंसान सिर्फ अपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करने की कोशिश करे तो दुनिया से बुराई खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी। रमजान का छुपा संदेश भी यही है।
शाहिद क़य्यूम की रिपोर्ट:-