सुहागिनों ने मांगी पति की लंबी आयु

पतिव्रता महिलाओं ने मंगलवार को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति एवं अकाल मृत्यु से बचाव के लिए पुण्यदायी वट सावित्री व्रत श्रद्धापूर्वक की। अपने अचल सुहाग व मंगलजीवन की कामना की। महिलाओं ने वटवृक्ष के समीप बैठकर पात्र में
सप्तधान्य भर कर उसे दो वस्त्रों से ढंक कर दूसरे पात्र में ब्रह्मा-सावित्री तथा सत्य सावित्री की मूर्ति स्थापित कर धूप-दीप,गंध,अक्षत से पूजन किया। उसके बाद वट को सूत लपेटकर उसकी पूजा कर परिक्रमा की। इस व्रत के दिन गरीबों व ब्राह्मणों को वस्त्र दान कर भोजन कराकर उनसे आशीर्वाद लिया। स्कंद पुराण के अनुसार यह पर्व ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस व्रत का प्रारंभ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से ही हो जाता है। जिसमें संकल्प के उपरांत तीन दिन तक उपवास किया जाता है। वट वृक्ष की परिक्रमा 108, 54, 17, बार श्रद्धापूर्वक किया जाता है। चावल बाजार शिवमंदिर, भूत नाथ मंदिर, तरंग होटल के पास स्थित वट वृक्ष सहित अन्य स्थानों के वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की गयी। सुबह से मंदिरों और वट वृक्षों के पास रौनक रही।

करवा चौथ व्रत के सामान ही है मान्यता:
वट सावित्री व्रत को सौभाग्य, दीर्घायु और आरोग्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। हिंदूू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री वट सावित्री व्रत रखती है, उसका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति को दीर्घायु मिलती है। इस व्रत की मान्यता करवा चौथ व्रत के सामान ही है। यह व्रत देश के अधिकतर हिस्सों में मनाया जाता है।
सावित्री कथा
वट सावित्री पूजा ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। पौराणिक ग्रंथ देवी भागवत में सावित्री और सत्यवान की प्रेरणास्पद कथा अपने आप में स्त्री सशक्तीकरण की कथा है। इस कथा में सावित्री अपने पति को यमराज के चंगुल से वापस जीत ले लाती हैं। सावित्री ने सत्यवान को जब अपने पति के रूप में चुना तो देवर्षि नारद ने उनके पिता अश्वपति से कहा कि सत्यवान गुणी हैं किन्तु अल्पायु हैं। एक वर्ष के अंदर इनकी मृत्यु हो जाएगी लेकिन सावित्री तो अपने चयन पर पूरा विश्वास था। जब सत्यवान की आयु के तीन दिन शेष बचे तो सावित्री मां भगवती से प्रार्थना करने लगी। यमराज सत्यवान को लेने आए सावित्री भी यमराज के पीछे चल दी। मना करने पर भी वह नहीं मानी और शास्त्रार्थ करती रहीं। शुभ, अशुभ कर्म, स्वर्ग, नरक, आराधना, यज्ञ आदि पर विमर्श के बाद यमराज ने सावित्री से ज्ञान और बुद्धि कौशल का लोहा मानते हुए पति प्रेम और उसके दृढ़ निश्चय को देखकर सत्यवान को जीवन दान दे दिया। तभी से महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं और अखंड सुहाग की कामना करती हैं। यह पर्व लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.