
पिंटू कुमार आर्य की रिपोर्ट:-
दाउदनगर अनुमंडल में वैसे स्कूल तो बहुत है लेकिन कुछ स्कूल ऐसे भी है जिन पर न तो जन प्रतिनिधि की नजर गई न ही सरकार की कोई ठोस कदम।
हम बात कर रहे है राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय दाउदनगर का गौरतलब हो कि यह दाउदनगर शहर के बीचोबीच स्थित है और यह सहर का एक मात्र संस्कृत विद्यालय है। यहाँ हर आने जाने वाले को एक नजर पड़ ही जाता है लेकिन अब तक किसी ने इस पर आवाज नही उठाया।यह विद्यायल बिहार सरकार के संस्कृत बोर्ड से संचालित होती रही है।कुछ दिन पहले तक यहा पढ़ाई होती थी और शिक्षक भी उपलब्ध रहते थे और साथ ही साथ यहाँ समय से परीक्षा भी संम्पन होती थी लेकिन अब की स्थिति ऐसी है कि संस्कृत विद्यालय में पढ़ाई तो दूर अब साफ सफाई के अलावे स्कूल का गेट तक नही खुलता है और अभी स्कूल के आगे कुछ ठेले कुलचे ओर फूटपाथी दुकान खुलती है।
इस बात को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर कार्यकरणी सदस्य सौरभ राजपूत ने जानकारी देते हुए अपने हवाले से कहा है कि बिहार सरकार की यही दो रंगी नीति बिहार को शिक्षा जगत को अंधकारमय करती जा रही है।अगर बिहार सरकार इसपर जल्द से जल्द कोई फैसला नही लेगी तो 28 जनवरी को विद्यार्थि परिषद के प्रखंड सम्मेलन के बाद हुंकार भरेगी ओर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
