
दाउदनगर की ऐतिहासिक धरती ने बुधवार की सुबह अपने एक ऐतिहासिक धरोहर व प्रखर समाजवादी चिंतक को खो दिया है। मशहूर चिकित्सक एवं स्वतंत्रता सेनानी डॉ राम परीखा यादव का 96 वर्ष की उम्र में उनके मौलाबाग स्थित आवास पर निधन हो गया। वे अपने पीछे पत्नी के अलावे चार पुत्र एवं एक पुत्री समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बड़े पुत्र डा. एस पी सिंह पूर्णिया में पदस्थापित हैं और उनकी पत्नी वही एक कॉलेज में व्याख्याता है। उनके दूसरे पुत्र डॉ. विनोद कुमार सिंह मशहूर नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और पुत्रवधू डा.रंजू महिला चिकित्सक है,दोनों अरवल जिले में पदस्थापित हैं। तीसरे पुत्र विनय कुमार सिंह मुंबई में इंजीनियर है। चौथे पुत्र विजय कुमार सिंह दाउदनगर व्यवसाई हैं।एकमात्र पुत्री रेणु देवी दरभंगा में रहती हैं और उनके पति चिकित्सक हैं। उन्होंने बुधवार की सुबह अपने आवास पर अपनी 90 वर्षीया पत्नी के समक्ष अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि डॉ राम परीखा यादव मूलरूप से ओबरा प्रखंड के डिहरा गांव के निवासी थे।वे तीन भाई थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ-साथ कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की। यहां तक कि स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद उन्होंने आजीवन पेंशन नहीं लिया। दाउदनगर कॉलेज दाउदनगर समेत कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना का श्रेय उन्हें दिया जाता है। बताया जाता है कि वे दाउदनगर प्रखंड में संसा चिकित्सालय में चिकित्सक थे, लेकिन उन्होंने सरकारी सेवा से त्यागपत्र देकर अपने आवास पर ही गरीबों की सेवा की ।उनके बारे में कहा जाता है कि दाउदनगर ही नहीं बल्कि पूरे जिले के इतिहास की जानकारी उनके पास थी। बिहार के स्वतंत्रता सेनानियों एवं चिकित्सकों के बारे में जानकारी प्रदान किया करते थे ।उनके निधन से दाउदनगर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में एक धरोहर को खो दिया है। उनके निधन की सूचना फैलते ही काफी संख्या में लोगों की भीड़ उनके आवास की ओर उमड़ पड़ी ।उनके पुत्र डॉक्टर विनोद समेत अन्य परिजन आवास पर मौजूद हैं। काफी संख्या में लोग पहुंचकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं दिवंगत रामपरीखा यादव को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि बाहर रहने वाले उनके पुत्रों एवं परिजनों को भी सूचना दे दी गई है और उनके आने का इंतजार किया जा रहा है।