पुष्पांजलि कर महापुरुषों को दी गई श्रधांजलि

आज दिनांक 3 दिसम्बर को शहीद प्रमोद सिंह पथ स्थित स्वामी विवेकानन्द राष्ट्रीय युवा मंच के कार्यालय में मंच के राष्ट्रीय संयोजक अनुज कुमार पांडेय के नेतृत्व में भारत माता के तीन महान सपूतों को सादर स्मरण कर उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित किया गया। गौरतलब है कि उन तीन महान सपूतों में से एक भारत माता के वीर सपूत,स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक, भारतरत्न, भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डाक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्मदिवस; दूसरे महान सपूत भारतीय स्वंत्रता आंदोलन के अग्निपुरुष, अमर बलिदानी खुदीराम बोस का जन्मदिवस और तीसरे महान सपूत भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के महानायक, परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अल्बर्ट एक्का का बलिदान दिवस है।

आज तीन दिसम्बर को इन तीन महा बलिदानियों को याद करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उन्हें हृदय से याद किया। सभीलोगों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर महान बलिदानियों को नमन करते हुए श्री पांडेय ने कहा कि देशरत्न डाक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत माता के ऐसे सपूत थे जिनके ज्ञान और बुद्धिमता का अंग्रेज भी लोहा मानते थे।

उनकी यादाश्त इतनी तेज थी कि एक बार एक अंग्रेज बच्चे के द्वारा एक भारतीय बच्चे से लड़ाई करने के उपरान्त जब मामला ऊपर तक पहुंचा तब राजेंद्र बाबू को गवाह के रूप में उपस्थित किया गया।राजेंद्र बाबू को अंग्रेजी नहीं आती थी।जबकि अंग्रेज बच्चे ने भारतीय बच्चे के साथ ज्यादती की थी और अंग्रेजी में गाली दिया था। राजेंद्र बाबू ने अंग्रेज बच्चे के द्वारा कही गई बात को गवाह के रूप में हूबहू सूना दिया। जिससे भारतीय बच्चे के साथ न्याय हुआ। राजेंद्र बाबू के यादाश्त को देखकर अंग्रेज अधिकारी ठिठक गये। आजादी के बाद भी राजेंद्र बाबू ने भारत माता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ा।वे एक राष्ट्रभक्त और बेहद ही सादगीपसंद इंसान थे। उनके मार्ग पर चलकर ही भारत में सुराज लाया जा सकता है।

खुदीराम बोस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खुदीराम बोस ऐसे युवा क्रांतिकारी थे जिनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के आकाश में ध्रुवतारे की तरह चमक रहा है।बचपन में माँ-पिता को खो देने के बाद भी वे जरा भी विचलित नहीं हुए और अपना जीवन भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजादी दिलाने में न्योक्षावर कर दिया।कहा जाता है कि फांसी पर चढ़ने वाले वे सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे।फांसी होने के बाद पूरे बंगाल में युवाओं के अंदर खुदीराम बोस की चिंगारी फुट पड़ी।उनके बलिदान ने बंगाल में क्रांति की ज्वाला को प्रज्जज्वलित कर दिया। बंगाल के दर्जी उनको समर्पित कर एक खास किस्म की धोती सिलने लगे। युवा उनके नाम लिखी धोती धारण करने लगे।बंगाल के लोकगीतों में खुदीराम बोस की बलिदानी गाथा को गया जाने लगा।लोकगीतों में इतनी कम आयु में लोकप्रिय होना यह संसार भर में बिरला उदाहरण है।

शहीद लांस नायक अल्बर्ट एक्का के बारे में बोलते हुए श्री पांडेय ने कहा कि शहीद अकबर्ट एक्का भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के अद्भुत नायक थे।उन्होंने दुश्मनों की गोलियों की बौछार के बीच घूंस कर पाकिस्तानी सेना को अकेले दम पर ही ध्वस्त कर दिया था।युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद उन्हें सेना के सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला जागरण पत्रक प्रमुख अभिनव कुमार, प्रेम पासवान,दिव्यांग एक्यूप्रेशर चिकित्सक डाक्टर विकास मिश्रा,अजय पांडेय,प्रशांत इंद्रगुरु,सतीश पाठकअभय पांडेय, तीर्थराज पांडेय, उमेश चौधरी, आकाश मिश्रा,बसंत गुप्ता,अंगिरा कुमार पंकज,निकेत नन्दन,निशा नन्दनी, प्रकाश, राजन,विशाल एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में मंच के राष्ट्रीय संयोजक अनुज कुमार पांडेय ने दिव्यांग दिवस पर मंच के साथ-साथ पूरे दाउदनगर के प्रेरणाश्रोत दिव्यांग एक्यूप्रेशर चिकित्सक डाक्टर विकास मिश्रा को अंगवस्त्र और स्वामी विवेकानन्द की तस्वीर देकर सम्मानित किया।

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