सरकार से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शिक्षक

संघ के जिला मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बाॅबी ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार का रुख देखते हुए संघ ने सरकार से पहले सुप्रीम कोर्ट में जाने का निर्णय लिया। समान काम के लिए समान वेतन के मामले में परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया है।
तीन नवम्बर को पटना में प्रदेश कमिटी की बैठक में सरकार से वार्ता की पहल करते हुए हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में कार्रवाई शुरू करने की मांग की गयी। लेकिन सरकार का रुख साफ नहीं होने पर संघ सुप्रीम कोर्ट में कैविएट सोमवार को दाखिल कर दिया ताकि राज्य सरकार उनके अनुरोध पर विचार नहीं करती है और अपील में जाती है तो एडमिशन लेबल पर ही अपील खारिज कराया जा सके। संघ ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश मिश्रा के माध्यम से कैविएट दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि मौके पर सुप्रीम कोर्ट में संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर ब्रजवासी के नेतृत्व में लखन लाल निषाद,हिमांशु शेखर,प्रभात मिश्र,बच्चा प्रसाद व संतोष साहेब मौजूद थे।
श्री बाॅबी ने कहा कि चाहे जो हो समान काम के लिए समान वेतन वेतन लेकर रहेंगे। सरकार अगर सुप्रीम कोर्ट में अनावश्यक अपील दायर कर यदि शिक्षकों से टकराहट मोल लेती है तो शिक्षक पठन-पाठन ठप कर हड़ताल पर उतरने को विवश होंगे। फिर तो कोर्ट से लेकर सड़क पर भी सरकार को घेरने का कार्य होगा। फिर तो आन्दोलन तय हैं। वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट में संघ की ओर से कैविएट दाखिल होने पर अब सरकार को प्रारंभिक अवस्था में ही मुँह को खानी पड़ेगी।राज्य सरकार उच्च न्यायलय के फैसला को हूबहू लागु करे अन्यथा संघ किसी भी हद तक जाकर चुनौती देगी।सरकार अपना किरकिरी करा रही है।वह खुद जानती है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी नियोजित शिक्षक के पक्ष में ही होगी।क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2016 को ही समान काम के समान वेतन का ऐतिहासिक फैसला दे चुकी है।भला अपने द्वारा दिए गए संवैधानिक फैसला को क्यों पलटेगी।अनावश्यक सरकार समय बर्बाद कर रही है।बिहार के लाखों शिक्षको को अपने भविष्य के लिये सोचने को मजबूर कर रही है।जबकि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही कह चुके है कि नियोजित शिक्षकों की चिंता मैं करूँगा।वे अपनी चिंता मुझ पर छोड़ दे। फिर यह हाई कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। उच्च न्यायलय के फैसला को हूबहू लागु किया जाय।
सुप्रीम कोर्ट में अनावश्यक अपील कर यदि सरकार शिक्षको से टकराहट मोल लेती है तो संघ विवश होकर आंदोलन करेगा।

कैविएट क्या होता है?
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कैविएट Caveat एक अग्रिम आवेदन के रूप मे समझा जा सकता है । किसी अपील याचिका मे अपील से प्रभावित होने वाला पक्ष संबंधित न्यायालय मे इसे फाईल करता है । इसके दाखिल करने के बाद यदि कोई पक्ष अपील करता है तो अपील करने से पहले अपीलकर्ता को कैविएट दाखिल करने वाले पक्ष को अपील की कॉपी सर्व करनी पड़ती है । कैविएट दाखिल करने वाले को अपील की कॉपी रिसिव कराये बिना अपील फाईल नही हो सकती है । परिणामस्वरूप जब अदालत अपील की सुनवाई शुरू करता है तो पहली हीं सुनवाई के दिन कैविएट दायर करने वाले पक्ष का अधिवक्ता अपील का विधिवत काउंटर दाखिल कर विरोध करता है । यदि अदालत को लगता है कि अपील आधारहीन या अनुचित है तो पहली हीं तिथि पर अपील खारिज कर दिया जाता है । इससे अपील के सहारे समय बर्बाद करने की कोशिश विफल हो जाती है ।

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