जिस घर में शौचालय नहीं है उस घर का सामाजिक सम्मान नहीं है, उस घर की इज्जत नहीं के बराबर है। आजकल लोग गाँवों या शहरों में लाखों रुपये का मकान बनवा लेते हैं, , ।घर की महिलाएँ व पुरुष हजारों व लाखों रुपये का जेवर बनवा लेते हैं परन्तु अपने घरों में पन्द्रह से बीस हजार रुपये का एक शौचालय नहीं बनवा पाते हैं और शान के साथ खुले में, खेत-खलिहान, गली व सड़क पर शौच करते हैं। यह लोंगों की कैसी सोच है? यह लोगों की कैसी सामाजिक प्रतिष्ठा है?
उपरोक्त बातें पाथ के प्रखंड मोनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने स्थानीय पुरानी शहर स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 133 पर आयोजित सामुदायिक बैठक में उपस्थित महिलाओं व किशोरी बच्चों को स्वास्थ्य, स्वच्छता व मच्छरजनित ए.इ.एस. बिमारियों मलेरिया, डेंगु, चिकनगुनिया, मस्तिष्क ज्वर, जीका वायरस व रोटा वायरस से जागरूक करते हुये कही। इनमें से सभी बिमारियाँ मादा मच्छर के काटने से होती है जबकि मस्तिष्क ज्वर मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर काटने से होती है।
बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया कि खुले में शौच करने से मच्छरजनित, मक्खीजनित व वायरसजनित सैकड़ों बिमारिया होती है जिससे हमारे देश में प्रतिवर्ष हजारों लोगों की जान जाती है, परन्तु फिर भी लोग खुले में शौच करने से एवं जहाँ-तहाँ गंदगी करने से बाज नहीं आते हैं। बैठक में श्रीसिन्हा ने बताया की लोगों को अपने घर में शौचालय बनाकर अपने घर को एक सम्मान देना चाहिए। मच्छरजनित उपरोक्त बिमारियों में सबसे लाईलाज व जानलेवा मस्तिष्क ज्वर है जो एक से पन्द्रह वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों को होती है। इसलिए लोगों को मच्छरजनित बिमारियों से बचने के लिए खुले में शौच नहीं करना चाहिए। जहाँ-तहाँ गंदगी नहीं करनी चाहिए, अपने-अपने घरों व उसके आसपास के क्षेत्र सहित नली-नालों की साफ-सफाई करनी चाहिए एवं रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए ।
इस बैठक में सेविका अनीता कुमारी, सहायिका किरण कुमारी, राघिका देवी, सुनीता देवी, इंदु देवी, जोहरा खातुन, पुनम कुमारी, उषा कुमारी, रानी कुमारी, रागिनी कुमारी एवं गीता कुमारी सहित दर्जनो महिलाएँ व किशोरी बालिकाएँ उपस्थित थीं।

