आपके गाँव, घर, समाज व परिवार में तेज बुखार एवं मच्छरजनित ए०इ०एस० अर्थात एक्यूट इंसेफलाईटिस सिंड्रोम के रोगी मिलते हों तो अतिशीध्र निकटतम सरकारी चिकित्सालय को सुचित करें या भेजें। जिससे समय रहते उस रोगी की जान बचायी जा सके ।
उपरोक्त बातें पाथ के प्रखंड मोनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने ओबरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित ए०एन०एम० व आशा बैठक में कही। बैठक में श्री सिन्हा ने बताया कि मलेरिया, डेंगु, चिकनगुनिया, मस्तिष्क ज्वर, जीका वायरस, रोटा वायरस, चांदीपुरा वायरस व एच०एस०बी० मच्छरजनित ए०इ०एस० बिमारियाँ हैं जो मादा मच्छर के काटने से होती है। ऐसे रोगी को प्राथमिक उपचार के तौर पर ताजे पानी की पट्टी दें। उपरोक्त बिमारियों में से मस्तिष्क ज्वर सबसे ज्यादा लाईलाज, जानलेवा व घातक बिमारी है जो एक से पन्द्रह साल के बच्चों में मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होती है । इस बैठक में श्री सिन्हा ने बताया कि उपरोक्त बीमारी से बचने के लिए लोगों को स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति काफी जागरुक होना चाहिए। घर एवं घर के आसपास साफ-सफाई करनी चाहिए। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग ज़रूर करना चाहिए।
बैठक में प्रभारी चिकित्सा पदाघिकारी डा० लक्ष्मीनारायण गुप्ता, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंघक मनीष कुमार, बी०सी०एम० प्रदीप कुमार सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।
