शिक्षक वह समुदाय है जो औरों को प्रकाशित करता है स्वंय जल कर

संतोष अमन की रिपोर्ट:-


आज दिनांक 07-09-2017 दिन गुरुवार को डायट तरार के प्रांगण में 2017-19 और 2016-18 सत्र के प्रशिक्षुओं के द्वारा शिक्षक दिवस सह शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य श्यामनन्दन शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक गौरीशंकर बाबू, वरिष्ठ व्याख्याता विनोद कुमार सिंह, नैय्यर इकबाल,सुरेश शर्मा, जमील अख्तर, नागेंद्र कुमार, धीरेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से दिप प्रज्ज्वलित कर एवं महिला प्रशिक्षु मृदुला कुमारी सिन्हा, सुजाता कुमारी, श्वेता कुमारी, कविता कुमारी, सोनी राज ने राष्ट्रगीत का गायन कर किया।इससे पहले कार्यक्रम में उपस्तिथ नन्ही बच्ची मानसी के द्वारा कार्यक्रम स्थल के द्वार पर प्राचार्य सहित सभी गुरुजनों का तिलक लगाकर एवं आरती उतारकर स्वागत किया गया। इसके बाद प्राचार्य महोदय के नेतृत्व में सभी लोगों ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति अपना समर्पण व्यक्त किया ।विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से प्रशिक्षुओं ने कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम किया। प्रतिभा शर्मा ने गुरुवंदना और सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। मनसा कुमारी,नीति कुमारी,ममता कुमारी, विना कुमारी ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। फिरोज अहमद ने उर्दू में गुरुवंदना प्रस्तुत किया। अर्चना सिन्हा, मनसा कुमारी ने एकल गीत प्रस्तुत किया। कविता कुमारी ने भजन प्रस्तुत किया। कृष्णा कुमार,मनीषा पांडेय,संजय किशोर और सन्तोष कुमार ने अपने गीत के माध्यम से गुरु का गुणगान किया। नन्हीं मानसी ने शिक्षकों के प्रति अपनी भावना को अंग्रेजी में प्रस्तुत किया, सभी लोगों ने ताली बजाकर मानसी का उत्साहवर्धन किया । सभी की प्रस्तुतियों को सराहना मिली। इसके बाद प्राचार्य महोदय एवं सभी सम्मानित व्याख्याताओं ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आयोजन के लिए सभी प्रशिक्षुओं को धन्यवाद दिया। सभी वक्ताओं ने भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डाला एवं वर्तमान परिवेश में शिक्षकों  को उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। सभी ने कहा कि शिक्षक कभी साधारण नहीं होते प्रलय और निर्माण उनकी गोद में खेलते हैं। शिक्षकों को निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए क्योंकि समाज उनकी ओर आशा भरी दृष्टि से देखता है, एवं उनसे संकटपूर्ण स्थिति का हल चाहता है। शिक्षक वह समुदाय है जो स्वंय जल कर औरों को प्रकाशित करता है ।

प्राचार्य महोदय ने इस अवसर पर विशेष रूप से भारत के मिसाइल मैन डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम से जुड़े एक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि वो किस प्रकार विद्यार्थियों का ख्याल रखते थे राष्ट्रपति होने के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के शिक्षक को जीवित रखा था। उनकी सादगी और विनम्रता एक मिसाल की तरह आज भी हम शिक्षकों का मार्गदर्शन कर रही है। गौरीशंकर बाबू ने कहा कि एक शिक्षक का उद्देश्य विद्यालय में विद्यार्थियों को केवल विषयगत शिक्षा देना नहीं अपितु विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास करना होना चाहिए ताकि विद्यार्थी हर प्रकार से मजबूत होकर समाज और देश की प्रगति में अपना योगदान दे सके। उन्होंने वर्तमान समय में शिक्षकों की बदहाली का भी जिक्र किया और कहा कि इतनी विषम परिस्थिति में भी यदि आपलोग शिक्षक दिवस कार्यक्रम का आयोजन कर रहें हैं तो यह काबिल-ए-तारीफ ही है। उन्होंने भारत की संस्कृति और सभ्यता का जिक्र करते हुए भारत के विकास में शिक्षकों के योगदान का जिक्र किया। विनोद कुमार सिंह ने कहा कि कभी गुरु द्रोणाचार्य ने एक प्रतिभसम्पन्न शिष्य एकलव्य का अंगूठा काट लिया था ठीक उसी प्रकार आज की व्यवस्था ने श्रेष्ठ शिक्षकों का अंगूठा काट लिया है ,किन्तु इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है हमें अपने ज्ञान के प्रकाश से संसार को प्रज्ज्वलित करते रहना है , ऐसा करने से निष्ठावान नागरिकों का निर्माण होगा और व्यवस्था में घुसे हुए आज के द्रोणाचार्य स्वतः समाप्त हो जाएंगे। सभी वक्ताओं ने कहा कि सम्मान मांगने से नहीं मिलेगा बल्कि अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा का लौ जलाये रखने से मिलेगा, एक न एक दिन जरूर लोग शिक्षकों के महत्व को समझेंगे बस केवल निरन्तर अपने मार्ग पर चलते रहने की आवश्यकता है। सम्बोधन के बाद प्राचार्य महोदय और सभी सम्मानित गुरुजन के साथ-साथ गैरशैक्षणिक कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन को सफल बनाने में उदय कुमार, रोहित कुमार, संतोष कुमार रस्तोगी,योगेंद्र कुमार अनिल,राजकुमार ठाकुर,मनसा कुमारी,ममता कुमारी,कुमार सुमन, शेखर कुमार,संतोष कुमार,पप्पू कुमार,संजय कुमार,परितोष, बबन आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य श्यामनन्दन शर्मा एवं संचालन अनुज कुमार पांडेय, रामप्रवेश कुमार और मृदुला कुमारी सिन्हा ने संयुक्त रूप से की। धन्यवाद ज्ञापन अनुज कुमार पांडेय ने किया। इस अवसर पर सभी सम्मानित व्याख्याता गण, दोनों सत्र के प्रशिक्षु,एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान गाकर किया गया

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.