17 वर्षों के बाद न्याय की राह देख रहे नरसंहार पीड़ित

अरवल जिला अन्तर्गत वंशी थाना के सेनारी गांव की घटना
अरवल जिला अन्तर्गत वंशी थाना क्षेत्र के सेनारी गांव के नरसंहार पीड़ितों को 17 साल बाद न्याय की आस जगी है। बुधवार को सेनारी गांव के प्रत्येक लोगों के जुबान पर बस फैसले की ही चर्चा हो रही थी। दोपहर में पैक्स अध्यक्ष मुकेश कुमार के दरवाजे पर कुछ लोग बैठे हुए थे। वे लोग गुरुवार को आने वाले फैसले की ही चर्चा कर रहे थे। गांव में मीडिया कर्मियों का आना जाना भी हो रहा था। पूछने पर पूर्व मुखिया कमलेश शर्मा कहते है कि भले हीं सुनवाई में देर हुई लेकिन पीड़ित परिवार को यह उम्मीद है कि इस घटना में शामिल लोगों को मृत्युदंड की सजा मिलेगी। मुकेश के दरवाजे पर हीं अजय शर्मा, संजय शर्मा, अजय कुमार भी बैठे हुए थे। दरअसल अजय का छोटा भाई रोहित भी मारा गया था। संजय शर्मा कहते हैं कि मैं अपनी आंखों से कुछ लोगों की गला रेतते देखा था। इसी बीच हमारे गले पर पसली चलाकर हमें भी मरा समझकर फेंक दिया। गनीमत थी कि मेरे उपर भी एक शव पड़ा हुआ था। इसी वजह से हमारी जान बच गई थी। इसी प्रकार अजय शर्मा भी उस काली रात को याद कर सहम जाते है। कहते है कि नक्सलियों ने न सिर्फ हमारा गर्दन काटा बल्कि पेट फाड़कर वहां फेंक दिया जहां लाशों की ढेर लगी थी। वहां मौजूद संजय शर्मा कुमार ने कहा कि हमारे गांव के अन्य लोगों के साथ नक्सली उसे भी साथ ले जा रहे थे। ठाकुरबाडी पहुंचने के कुछ दूर पहले मुझे मौका मिला और मैं भाग निकला। संजय ने बताया कि इस घटना में अमरेश शर्मा तथा विमलेश शर्मा दोनों सगे भाई की गला रेती गई थी। इस मामले के सूचक चतामणि देवी के पति अवध किशोर शर्मा तथा एक मात्र सुपुत्र मधुकर की भी एक-एक कर गला रेत दिया गया। इतना ही नहीं रामनाथ शर्मा के सामने उनके भतीजा कुंदन की गला रेत दी गई और वे देखते ही रह गये। नीरज शर्मा का गला रेतने के साथ-साथ भगवतीपुर निवासी उसके बराहिल को भी नहीं बख्शा गया।

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