दाउदनगर से शाहिद क़य्यूम की रिपोर्ट:
हमारा शहर एक नगर पंचायत क्षेत्र है, कहने को तो हमारा नगर पंचायत (नगरपालिका) आज़ादी के पूर्व सन् 1885 का है और साथ ही साथ जिला में सबसे पुराना है जिसके लिए हम गर्व भी महसूस करते हैं; मगर नहीं है कोई भी सार्वजनिक शौचालय। हमारा शहर क्षेत्र के कई सारे ग्रामीण वासियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाओं को मुहैय्या कराने के साथ साथ रोज़गार के कई सारे अवसर प्रदान कराती है। शहर में पुलिस थाना, डाकघर, ब्लॉक ऑफिस, अनुमंडल, जेल, टेलीफोन एक्सचेंज ऑफिस, अस्पताल, कॉलेज इत्यादि मौजूद तो हैं मगर नहीं है कोई भी सार्वजनिक शौचालय।
पिछले कई वर्षों से हमारे शहर दाऊदनगर में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का अवागमन बढा़ है जिसमे पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। त्यौहार के समय तो दूर-दराज से आने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाती है। उस दौरान जब उन्हें शौच महसूस होता है तो शौचालय की अभाव में पुरुष संडक के किनारे जमे कूड़े-करकट में ही शुरू हो जाते हैं परंतु महिलाएं बेबस हो जाती हैं। इंटरनेट से लैश अपना शहर कई सारे उच्च कोटि की सुविधाओं को प्रदान करती है जैसे एयर कंडिशन्ड रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल इत्यादि। मगर नहीं है कोई भी सार्वजनिक शौचालय।
स्वच्छ भारत अभियान के विज्ञापन मात्र में करोड़ों रूपये खर्च हुए, झाड़ू लेकर तस्वीर खिंचवाने का सिलसिला भी खूब चला, घर घर शौचालय अभियान की भी पहल हुई, पुरे देश में सफाई अभियान का मिलाजुला असर भी दिखा। दाउदनगर नगर पंचायत के अंतर्गत हर मोहल्ले में डस्टबीन (कचरे का डब्बा) मौजूद है, मोबाइल शौचालय जैसी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है मगर नहीं है कोई भी सार्वजनिक शौचालय।

Ya right bro,i think u r arising an absolutely right topic….bcs now a days people only thinks about himself/herself
Bt nobody cares about wht’s going in the society…….fab job….
Keep it up
Thanx a lot of you.