जनता की आवाज़: जीएसटी अच्छा पर जीएसटी रिटर्न करना व्यापारियों के समझ से बाहर की चीज़

भारत की सबसे बड़ी क्रांति जीएसटी लागू हो चुका है। यह देश का नोटबंदी के बाद दूसरा कठोर फैसला अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। इस क्रांतिकारी कदम से कालाबाजारी खत्म होगी, भरस्टाचारियो पर नकेल कसी जाएगी। इस तरह के बातो के बीच लिया गया यह सबसे अहम फैसला, लेकिन…
क्या करे हम? कहाँ जाए हम? कौन है ओ जो हमारी उलझनें सुलझा सके? अरे कोई है जो हमे बता सके कि क्या करना है? ऐसे कई सारे प्रश्न हमारे मन मे उभर रहे है।

क्यूँ?

क्यूँकि हम समझ ही नही पा रहे है कि हमे GST में करना क्या है?

हम जैसे छोटे व्यपारी अपने दुकान का लेखा जोखा कैसे रखे? कैसे हमे पता चले कि हम किस दायरे में आते है? सरकार ने 20 लाख के सालाना खरीद बिक्री पर रजिस्ट्रेशन निर्धारित नही किया है, लेकिन किस तरह के खरीद बिक्री पर? बहुत सारे आइटम जीएसटी में है और बहुत सारे जीएसटी मुक्त है। तो जीएसटी टैक्स पैड आइटम की खरीद बिक्री का 20 लाख या दोनों के खरीद बिक्री का 20 लाख?

सरकार ने 20 से 75 लाख के बीच खरीद बिक्री पर रजिस्ट्रेशन करवाना निर्धारित किया है। और इसपर जीएसटी टैक्स देना होगा। और टैक्स 0.5% cgst और 0.5% sgst यानी टोटल सलाना बिक्री का 1% देना हो। और साथ साथ हर महीने के 15 तारीख तक रिटर्न जमा करना होगा। यानी टोटल जो आप समान खरीदे है उसका पक्का बिल और जो समान आप बेचे है उसका पक्का बिल आपको GST के वेवसाईट पर जाकर भरना होगा और ये सारे डॉक्युमेंट आप स्वयं भरे या किसी वकील से करवाये भरना तो पड़ेगा ही। चाहे इसके लिए वकील को हर महीने ऊपरी आमदनी ही देनी क्यो न पडे।

जीएसटी से फायदा-घाटा तो अभी दूर की बात है, व्यापारियों को लगता है कि उन्हें जरूरत से ज्यादा लिखा-पढ़ी करनी होगी, छोटी से छोटी बात का भी हिसाब रखना होगा। टैक्स के अलावा ऊपर से वकील खर्चा बढेगा। किस प्रोडक्ट में कितना टैक्स है उसका बिल कैसे बनेगा, ग्राहकों का बिल में कितना टैक्स लगना होगा, उस टैक्स का वहन ग्राहकों को करना है या स्वयं दुकानदार को? जीएसटी में कर की एक दर होनी चाहिए थी। कई तरह के दर होने से हमे रिटर्न दाखिल करने से लेकर अन्य कई मामलों में परेशानी का सामना करना पडे़गा।

हम जीएसटी का सपोर्ट करते है, लेकिन उसमें कुछ खामियां भी दूर की जानी चाहिए। मसलन, प्रत्येक माह में तीन बार ऑनलाइन रिटर्न भरने से हम व्यापारियों को काफी परेशानी होगी। क्योंकि ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने में त्रुटियां रहने पर पेनल्टी का प्रावधान है। यहाँ तक कि गलती से भी गलती हो गई तो पकड़े जाने पर जेल की भी सजा का प्रवधान है, जिसका अभी से ही डर लग रहा है। भाई हम व्यपारी है कोई मुजरिम नही। पुराने स्टॉक को जीएसटी से बाहर रखा जाता तो परेशानी कम होती।

इन जैसे कई सारे प्रश्न है जो हमारे मन मे उमड़ रहे है। उसके निदान के लिए अधिकारियों के बीच हमारी बहस जबतक नही होगी, सारे प्रश्नों का सरल जबाब जब तक नही मिलेगा तब तक हमारी उलझने नही सुलझेंगे।

संजय गुप्ता, व्यापारी

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.