जनता की आवाज़ : नोटों की किल्लत से जूझता आम आदमी

अरूण कुमार (साईबर कैफे)

शादी-विवाह का मौसम और नोटों की बहुत बड़ी किल्लत, आखिर आम आदमी ही क्यों पीस जाता है सरकारी व्यवस्थाओं के बीच?

आजकल भारतीय स्टेट बैंक में पैसों की मारामारी चल रही है, और ग्राहक मुँह बाये अपनी किस्मत को ही जिम्मेदार मान रहें हैं, कारण और कोई नजर ही नही आ रहा है, जिसे वह जिम्मेदार मान सकें। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत से परेशान आम आदमी को नए साल में शादी विवाह के मौशम में राहत मिलने की उम्मीद थी। धोषणा की गई थी कि नई जारी की गई करंसी की कमी को देखते हुए नासिक की करंसी नोट प्रेस  में रोज छापे जाने वाले 500 रुपए के नए नोटों की संख्या में तीन गुने तक का इजाफा होगा।

लेकिन दाउदनगर शहर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की स्थिति को देखते हुए ऐसा लगा कि जैसे नोटों के अभाव में कुछ ही दिनों में इस बैंक में ताला लगने वाला है।

जिस भी घर में शादी है वे अपने पैसे निकालने बैंक में आते है। खुशी-खुशी निकासी फॉर्म पर अपना अमाउंट लिखते है,(अरे भाई घर मे शादी है, ज्यादा खर्चा है,पैसे तो ज्यादा निकालने पड़ेंगे न) लंबी लाइन में लगते है, बेसब्री से भूखे प्यासे अपनी बारी का इंतजार करते है, घंटो बाद उनका नम्बर आता है, निकासी फॉर्म को बैंक कर्मचारी की ओर तेजी के साथ बढ़ाते है और उतनी ही तेजी से वह फॉर्म उन्हें वापस मिलता है और झट से सुनने को मिलता है दस हजार से ज्यादा नहीं मिलेगा। कल्पना कीजिए कैसा लगा होगा उस व्यक्ति को। साँप सूंघ गया होगा बेचारे को, मुँह से आवाज नही निकलती होगी, किसी तरह पूछा होगा काहे सर, जबाब मिला पैसे नहीं हैं बैंक में।

क्या करें? किससे कहे? कहाँ जाए?  जहां पैसे की व्यवस्था हो! ऐसे अनगिनत सवाल मन मे उमड़ रहें होंगे उस व्यक्ति को।

कितने ही दिनों से बैंक में पैसे की किल्लत से शहर के सारे एटीएम बंद पड़े है। अभी कुछ ही दिन पहले बहुत ही हाई-फाई के साथ स्टेट बैंक के ही बगल में स्टेट बैंक ई-कॉर्नर का उद्घाटन हुआ, लोगों को लगा चलो अब पैसे की तंगी खत्म होगी, लेकिन वही हुआ जिसका मुझे डर था, उद्घाटन के बाद से स्टेट बैंक ई-कॉर्नर कितने दिन खुला और कितना देरी खुला यह हमें अच्छी तरह याद है, पर मुझसे पूछा जाएगा कि कितने दिन बंद रहा तो मैं इसका जबाब नहीं दे पाऊंगा। बस इतना ही जबाब दूंगा अनगिनत दिन।

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