भारत सरकार स्वतंत्रता सेनानीयों को मिलने वाला पेंशन का सम्मान कर रही है बंद

सूबे के स्वतंत्रता सेनानी स्व० रामनरेश सिंह

17 अप्रैल 2017 को बिहार सरकार ,स्वतंत्रता सेनानी या उनके आश्रित को एक  बड़ा समारोह आयोजित कर सम्मानित कर रही है। दूसरी तरफ भारत सरकार कुछ-कुछ बहाना बना कर स्वतंत्रता सेनानी या उनके आश्रित को मिलने वाला पेंशन का सम्मान बन्द कर रही है। स्व० रामनरेश सिंह जिनका जन्म गोह प्रखण्ड के बुधई खुर्द गांव में हुआ था जो आज भी  बिहार के औरंगाबाद जिले के सुविधा विहीन छोटा सा गांव है। उनका कर्म-भूमि दाउदनगर रहा था जहां उनके नाम पर एक भी संस्था नहीं है ताकि आने वाली पीढ़ी उन्हें याद करे। रामनरेश बाबू को स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत करने के कारण 1930 एवं 1934 में जेल भेज दिया गया था। 1942 में ब्रिटिश सरकार ने इनके गिरफ्तारी के लिए 5000 रू० का इनाम घोषित कर दिया। गिरफ्तारी हुई लेकिन बाद में अंग्रेज पदाधिकारी मिस्टर आईक की छोटी चुक के कारण जेल से भाग निकले। सन 1943 में आॅल इण्डिया डिफेंस एक्ट नजरबंदी कानून के तहत गिरफ्तार कर गया के सेंट्रल जेल के 14 नम्बर सेल में रखा गया और जेल से भागने तथा गुप्त रूप से आंदोलन का नेतृत्व करने के आरोप लगाकर कई तरह के मुकदमे लाद दिए गए फलत: आजादी के बाद ही रिहा हो सके। 1952 का प्रथम आम चुनाव में दाउदनगर विधानसभा से चुनाव जीत कर विधायक बने 1967 में रामनरेश बाबू बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बने। 1978 में लम्बी बिमारी के वजह से उनकी मौत हो गयी।

 उनकी पत्नी शांति देवी जिंदा हैं लेकिन उनका केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाली स्वतंत्रता सेनानी परिवारीक पेंशन लगभग एक वर्ष से बंद है। पत्राचार जारी है, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जिसने मौखिक रूप से यह कह कर पेंशन बंद कर दिया कि भारत सरकार के आदेशानुसार यह कदम उठाया गया है, बैंक ने मेरे लिखित आवेदन का अभी तक संतोषजनक जवाब नही दिया। क्या इस समस्या का समाधान होगा? क्या बिहार सरकार पहल कर इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेगी या न्यायालय का सहारा लेने को विवश होना पड़ेगा? देखना यह है कि क्या सच में स्वतंत्रता सेनानी या उनके आश्रित के प्रति सरकार गंभीर है या सिर्फ राजनीति हो रही है। हालांकि हाल के कुछ वर्षो में बिहार सरकार द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय और प्रशंसनीय है ।

                                 डॉ० संजय कुमार

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