औरंगाबाद,14 अप्रैल
औरंगाबाद जिला की 27 साल पुरानी साहित्य, कला एवं संस्कृति की संवाहक संस्था ‘साहित्य कुज”द्वारा स्थानीय अघिवक्ता भवन में कवि गोष्ठी आयोजित की गयी,जिसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष देववंश सिंह ने की ।
युवा हास्य व्यंग्य कवि एवं “साहित्य कुंज” के महासचिव
अरविन्द अकेला के कुशल संचालन में आयोजित गोष्ठी की शुरुआत करते हुये वरीय कवि जनार्दन मिश्र “जलज”ने मन की व्यथा गुनगुनाते हुये कहा
-“मन का पंछी बैठकर,
गाता नेह के गीत,
कहीं विरह की आग है,
कहीं प्रीत की रीत ।
एक तरफ वरिष्ठ कवि हर्षदेव प्रेमी एवं राम किशोर सिंह की कविता में देशभक्ति की व्यार देखने को मिली वहीं युवा कवि अनुज बेचैन ने लोंगों को श्रृगारिक कविता की इन पंक्तियों -“आरजु मुस्कुराती रही रात भर,
जिन्दगी गुनगुनाती रही रातभर ।
सुनाकर लोंगों के मन को गुदगुदाया ।
युवा कवि घनंजय जयपुरी ने अपनी मगही कविता की इन पंक्तियों-” पापा कही देख ताक के हमर करा दा शादी” सुनाकर लोगों को हँसाया तो वहीं दुसरी तरफ युवा कवि अरविन्द अकेला ने लोगों को श्रृंगार की दुनियाँ में ले जाते हुये यह प्रेम गीत “गीत अपने प्यार के” की इन पंक्ति-
क्या सुहाने दिन थे,
जब मिले थे पहलीबार.
आँखों हीं आँखों में.
दिल हुये थे बेकरार.
थे वे दिन कितने इकरार के.
हम भी लिखेंगे,गीत अपने प्यार के ।” सुनाकर वातावरण को श्रृंगारिक कर दिया । युवा शायर अब तालिब ने इन पंक्तियों को गुनगुनाते हुये कहा–
“तुझे मैं याद करना चाहता हूँ,
सफर आसान करना चाहता हूं ।
नवोदित कवि निभय कुमार मिश्र की कविता की यह पंक्ति-“छुकर मेरे गालों को गुजरा कौन हाथों से,साँसें हमारी क्यों अभी तक थरथराती है ” भी काफी सराही गयी ।
उपरोक्त गोष्ठी में सिद्धेश्वर विद्यार्थी,सुरेन्द्र कुमार मिश्र,प्रेमेन्द्र कुमार मिश्र,प्रियदर्शी किशोर श्रीवास्तव,विजय कुमार अकेला,एवं शिवपुजन कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे।
गोष्ठी के पहले साहित्य कुंज का पुर्नगठन किया गया जिसमें देववंश सिंह को अघ्यक्ष,राम किशोर सिंह,अरुण औरंगावादी,शब्बीर हसन शब्बीर ,हर्षदेव प्रेमी एवं रमन सिन्हा को उपाघ्यक्ष,अरविन्द अकेला – महासचिव,प्रियदर्शी किशोर श्रीवास्तव -सचिव, श्रीराम राय-संगठन सचिव,प्रो.सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह -संयोजक,गोदावरी कुमारी-कोषाघ्यक्ष,जबकि उदय कुमार सिंह,जगन्नाथ सिंह,प्रो.तारकेश
वर प्रसाद सिंह,सारंगघर सिह,प्रो.टी.एन.सिन्हा,सुरेन्द्र कुमार मिश्र, एवं सिद्धेश्वर विद्यार्थी को संरक्षक , जिलाघिकारी एवं आरक्षी अघीक्षक को पदेन प्रशासनिक संरक्षक जबकि स्थानीय सांसद,विधायक व विघान पार्षद को पदेन राजनीतिक संरक्षक बनाया गया है ।

