गलती करके सुधर जाने वाले होते हैं इंसान


 श्रीरामचरितमानस यज्ञ समिति द्वारा सत्संग नगर स्थित सत्संग स्थल पर आयोजित प्रवचन में चित्रकुट से पधारी कथावाचक उषा रामायणी ने कहा कि भक्ति करने से भगवान की प्राप्ति होती है। इसे मिटाकर पाने की चेष्टा करने वालो को परमात्मा से दर्शन नहीं होता है। राम, कृष्ण दोनो एक ही हैं। समय-समय पर दोनों ने लीलायें कर मनुष्य को सही पथ दिखाने का प्रयास किया है। भगवान शंकर ने ज्योतिष रूप धारण कर भगवान राम के बाल्य रूप का दर्शन किया। नारी शक्ति की चर्चा करते उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाखून छोटे और बाल बडे होने चाहिए लेकिन फैशन में यह उल्टा है। बाल छोटे और नाखून बडे किये जा रहे हैं। नारियों को नारी का परिचय विवाह के पूर्व पिता, बाद में पति तथा बुढापे में पुत्र से होना चाहिए। गलती करके सुधर जाने वाले इंसान होते हैं। उन्होंने राम जन्म से नामकरण, तडका, मारीच वध तथा जनकपुर तक का संगीतमय वर्णन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों के नामकरण पर उन्होंने कहा नाम का प्रभाव जीवन पर पडता है। सोच-समझकर अच्छा नामकरण करें। जामिल ने अपने पुत्र का नामकरण नारायण किया तो भवसागर को पार कर गया।

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