मानव को समदर्शी होने की शिक्षा देता है श्री भागवत कथा

                                                                                      प्रवचन करते स्वामी राजनारायणाचार्यजी महाराज

संतोष अमन की रिपोर्ट:

शहर के पांडेय टोली में श्री भागवत कथा करते हुये देवरिया पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्यजी महाराज ने कहा कि कलियुग में भागवत कल्पवृक्ष है, इसके श्रवण करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं, साथ ही हृदय को शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि श्री भागवत भक्ति का सबसे बड़ा और अनूठा ग्रंथ है। यह मानव को समदर्शी होने की शिक्षा देता है। भागवत के अनुसार प्राणियों के शरीर भगवान के द्वारा बनाई गई है तथा उसमें स्वयं भगवान बिराजमान हैं। अतः मनुष्य को जात-पात, भेदभाव से उपर उठकर सभी प्राणियों के हृदय में भगवान का दर्शन करते सभी की सेवा करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना स्नातन धर्म का मूल मंत्र है। इस मौके पर अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक बैजनाथ पांडेय, रघुवंशमणि पांडेय, नंदकिशोर पांडेय, सत्येंद्र पांडेय, जीतेन्द्र पांडेय, शर्मानंद पांडेय, विजय पांडेय, किशोरी मोहन मिश्र, गजाधर प्रसाद सिंह, नाथु प्रसाद आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।

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