सोनपुल हादसा: सुरक्षा पद्यती से समझौता बना मौत का मुख्य कारण


कल दाऊदनगर तथा नासरीगंज के बीच में सोन नदी पर बन रहे पुल के कार्य के दौरान एक मामूली घटना में प्रोजेक्ट कन्स्ट्रक्शन हेड (पीसीएच) ई संजय कुमार सिंह की मौत हो गई। मौत का कारण सीढ़ी से गिरना बताया गया है परंतु ऊँचाई को लेकर शंका बनी हुई है क्यूँकि कुछ अख़बार का कहना है कि ऊँचाई 10 मीटर थी तो किसी अख़बार का दावा 20 मीटर की है। घटना पाया संख्या 26 के पास की बतायी जाती है। हैरानी इस बात की है कि एक ख्याति प्राप्त कम्पनी में सुरक्षा को लेकर ऐसी लापरवाही क्यूँ?

कन्स्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में कार्यस्थल पर कर्मचारियों तथा बाहरी लोगों के सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सेफ़्टी मैनेजर की होती है। 

कोई सा भी प्रोजेक्ट कई चरणों में सम्पन्न होता है परंतु प्रत्येक चरण में सुरक्षा अहम हिस्सा होता है जिसके लिए अनुभवी सेफ़्टी टीम होती है जो सेफ़्टी से जुड़ी हुई हर ज़रूरी पहलू को परखती है साथ ही हर ज़रूरी सेफ़्टी इक्विप्मेंट मुहैय्या कराती है। पूरी तरह से जाँच के बाद ही कार्य के लिए अनुमति दी जाती है तथा कार्य के दौरान देख रेख में सेफ़्टी टीम मौजूद रहती है। इसके अलावा समय समय पर सेफ़्टी की ट्रेनिंग तथा ऑडिटकरायी जाती है। इतना सब के बावजूद ऐसी घटना सेफ़्टी पद्यती पर सीधा सवाल खड़ा करती है

कोंक्रिट से बनी सिग्मेंट जब कार्यस्थल पर मौजूद था तो कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मुहैय्या कराना भी ज़रूरी था। ब्रिज तो कभी सड़क पर, कभी नदी पर तो कभी रेलवे लाइन के ऊपर बनती है। अगर रेलवे लाइन पर ब्रिज बन रही हो तो आप यह कह कर सेफ़्टी से अलग नहीं हो सकते कि रेलवे के हाई वोल्टिज के चलते किसी मज़दूर या एंजिनीर की जान चली गई। शायद एचसीसी के लिए इंसान के जान की क़ीमत सुरक्षा मुहैय्या करने से भी सस्ती है तभी तो मैनज्मेंट को अधूरी सुरक्षा के साथ कार्य को सम्पन्न कराने की सूझी।

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