मगही के विकास पर उठी मांग

संतोष अमन की रिपोर्ट:

अनुमंडल प्रगतिशील मगही समाज की बैठक अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक गौरीशंकर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में शामिल लोगों ने मगह एवं मगही भाषा की उपेक्षा पर रोष प्रकट किया।

श्री सिंह ने कहा कि मगही भाषा मगध की जन भाषा है जो बिहार, झारखंड एवं छतीसगढ समेत 18 जिलो में बोली जाती है। लाखो लोगों की यह मातृ भाषा है। इसकी उपेक्षा के चलते मगध की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा व इतिहास आम मगधवासी के जीवन से लुप्त होता जा रहा है। जन भाषा (मातृभाषा) की उपेक्षा होने से अप संस्कृति पनपती है और लोगों का स्वाभिमान मर जाता है। सर्वसम्मति से मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। इस मौके पर सुनील मिश्रा, राजेन्द्र पाठक, विनय गुप्ता, संजय कुमार, अर्चना देवी, शकुंतला वैभव, कुसुम देवी जगनारायण पासवान, संतोष यादव, प्रमोद गुप्ता, प्रमोद शर्मा आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।

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