स्टेट बैंक के पास एक भी सार्वजनिक चापा कल नहीं

मंसूर आलम की रिपोर्ट:

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, दाउदनगर शाखा के आस पास एक भी सावर्जनिक चापाकल का न होना बहुत ही शर्म की बात है। समझ में नहीं आता कि यहाँ की जनता और दुकानदार इसके लिए किसे दोषी ठहराए? न तो बैंक को फ़िक्र है और नाही नगरपंचायत को। वहां के स्थानीय लोगो ने बैंक के ठीक बगल में ही आपसी चंदा इकठ्ठा कर चापाकल गड़वाया था जो कि काफी उपयोगी सिद्ध हुआ था। अगर तुलना की जाए तो बाजार के इलाके में जितना उपयोग उस चापाकल का होता था शायद ही किसी और चापाकल का होता हो। जिस जगह उस चापाकल को लगाया गया था ओ इत्तेफाक से स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के जमीन के मालिक की ही थी। अब उस जगह पर एटीएम लगाई जा रही है इस लिए उस चापाकल को वहां से उखाड़ दिया गया है। अभी तो ठण्ड है, पानी की थोड़ी समस्या होगी पर गर्मी के मौसम में यहाँ पर आने वाले बैंक के ग्राहक के साथ साथ यहां खरीदारी करने आये ग्राहकों को कितनी बड़ी समस्या उत्पन होगी इसका अंदाज़ा शायद यहाँ के जन प्रतिनिधि को अबतक नहीं है।

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