
लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत पूरे भारत में चुनाव हो रहे है लोग अपने राष्ट्र के निर्माण के साथ साथ रोजगार, शिक्षा, जीवन्यामी व्यवस्था की सुदृढ़ व्यवस्था के लिये लोग अपनी क्षेत्र के सांसद चुनेगे जो प्रधानमंत्री का चुनाव करेंगे इस संसदीय प्रणाली के अंतर्गत बहुत संख्या में राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर के साथ साथ निर्दलीय रुप में भी प्रत्याशी जनता के हितैषी के रूप में खड़े है, और जनता के बीच उनका सुख दुख का हितैषी अघोषित रूप से बनने की जुगत में है ताकि आम जनता का वोट हासिल किया जा सके। इससे इतर लगभग कमोबेश सभी संगठन या प्रत्याशी जाति या धार्मिक आधार को महत्व देने से भी नही चूक रहे है। काराकाट लोक सभा का मतदान अंतिम चरण में है।काराकाट संसदीय क्षेत्र से कुल 37 उम्मीदवारों ने अपनी नामजदगी का पर्चा निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष दाखिल किया था जिसमें 10 का नामांकन स्कूटनी के बाद रद्द हो गया है।जबकि शेष 27 उम्मीदवारों का नामांकन वैध पाया गया है ।
रहते हैं भिन्न भिन्न जातियां:
भारतवर्ष एक लोकतांत्रिक देश है जिसमे भीन्न भिन्न धर्म, जाति, समुदाय के लोग रहते है और भारत के एकता को सशक्त बनाते है लेकिन चुनाव प्रक्रिया के अंतर्गत ये अल्पमत जातिया इस चुनाव के समकर्णो से गौन नजर आते है जबकि वर्गीय आधार पर देखा जाए तो ये सभी जातियों का मत लगभग सबसे अधिक होता है लेकिन जातिगत नेता या संगठन या फिर आंदोलनों के कमी के कारण अत्यंत पिछड़ा वर्ग की जातियां माली, मालाकार, मांगर, मदार, मल्लाह, मंझवार, मारकण्डेय, मोरियारी, मलार, मालहोर, मौलिक, राजधोबी, राजभर, रंगवा, वनपर, सौटा, सोता, अघोरी, अबदल, कसाब,कसाई, चीक, डफाली, धुनिया, धोबी, नट, पमरिया, भठियारा, भाठ, मेहतर, लालबेगिया, हलालखोर, भंगी, मीरीयासीन, मदारी, मोरशिकार, साई, फकीर, देवान, मदार, मोमीन, जोलहा, अंसारी, अमात, चुड़िहार, प्रजापति कुम्हार, राईन, कुंजडा, सोयर, ठकुराई, नागर, शेरशाह बादी, बक्खो, अदरखी, छीपी, तीली, इदरीशी या दर्जी, सैकलगर, सीकलगर, रंगरेज, सिंदुरिया, कैथल वैश्य, कथबनिया, मुकेरी, ईट फरोस, ईटा फरोस, गदहेड़ी, ईटपज, इब्राहिमी, बढ़ई, पटवा, कमार, लोहार, कर्मकार, देवहार, सामरी वैश्य, हलुवाई, पैरघा, परिहार, जागा, लहेड़ी, राजवंशी, रिसिया, देशिया, पोलिया, कुल्हैया, अवध बनिया, बरई तमोली, चौरसिया,कानू, कलंदर, कोछ, केवट, कादर, कोरा ,कोरकू, केवर्त, खटवा, खतौरी, खंगर, खटिक, खेलटा,गोड़ी, गंगई, गंगोता, गंधर्व, गुलगुलिया, चांय, चपोता,चंद्रवंशी कहार कमकर, टिकुलहार, ढेकारू,तमरिया, तुरहा, तियर, धानुक, धामिन, धीमर, धनवार, नोनिया, नाई, नामशुद्र, पाण्डी,पाल भेड़िहार गड़ेरी, प्रधान, पिनगनिया, पहिरा, वारी, बेलदार, बिन्द, सेखड़ा, बागदी,भुईयार, भार, भास्कर, आदि इन समीकरण से मुक्त नजर आते आते है ।
छात्र कुणाल किशोर बताते हैं कि धार्मिक या जातिगत मसला उन्ही के साथ है जिनका वोट प्रतिशत अत्यधिक है या फिर एकमुश्त होकर इनका( धर्म/जाति) अपना वोट देते है। प्रत्यासी भी इन्ही लोगो के बीच घूम घूम कर उन्ही जाति/ धर्म के ऊपर के नेताओं के नाम लेकर बड़ा हितैषी साधने में लगे हुए हैं।