Art & Literature of Daudnagar

दाउदनगर की ज़मीन कई सारे साहित्यकारों, शायरों था फिल्म जगत से जुड़े हुए लोगों को जन्म दिया है। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी का जन्म दाउदनगर में ही हुआ था। इसके अलावा मौलवी अब्दुल्लाह, क़मर म्हदुमी, क़ैसर दाउदनगरी, अश्विनी चंद्र पाठक, सय्यद शाह हमाद अहमद क़ादरी, डॉ बख़्तियार नवाज़, शाहिर दाउदनगरी, इस्लाम सैदा, तनवीर अहमद शागिल, शहीद हुसैन कासमी, ब्रजेश भगत, मिन्हाज नक़ीब, राज़ी साहब जैसे मशूहर कवियों का भी दौर काफी प्रचलित रहा है।

पुस्तक के रूप में डॉ सुरेश प्रसाद द्वारा लिखित “मदिरा और चाय” और डॉ बख़्तियार नवाज़ के द्वारा लिखित “क़लम के आंसू” ने खूब प्रसिद्धि बटोरी है।

साहित्य को बढ़ावा देने तथा लेखकों का मनोबल बढ़ाने के लिए दाउदनगर के पुस्तकालयों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्य रूप से पुरानी पुस्तकालयों के नाम इस प्रकार हैं:

– महर्षि दयानंद सरस्वती पुस्तकालय
– मौलाना हाली उर्दू लाइब्रेरी
– डॉ अल्लामा इक़बाल लाइब्रेरी

मोजुदा समय में दाउदनगर की शान बान को बढ़ाने का काम फिल्म तथा नाट्य क्षेत्र से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्ति धर्मवीर भारती ने किया। पुरे भारत वर्ष में दाउदनगर को कला के क्षेत्र में एक पहचान दिलाई है। उनके द्वारा लिखित तथा निर्देशित नाटक “अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा” ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार अर्जित की है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें दाउदनगर रत्न से भी नवाजा गया है।

संतोष अमन, जिन्हें बच्चे देखने के बाद न तो संतोष कर पाते हैं और नाही अमन क़ायम कर पाते हैं। ऐसा हो भी क्यों न? बच्चों के चहेते जो ठहरे। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ संतोष अमन की! चेहरे पे सदैव मुस्कान भरे, कला के प्रेमी, तुतलाती हुई बोली तथा बचकाना हरकत करके बच्चों को हंसा हंसा कर लोटपोट करने का हुनर रखने वाले संतोष भाई का जन्म 6 मार्च 1977 को दाउदनगर के पुरानी शहर में हुआ।