लगातार जागरूकता अभियान चलायेगी नगर परिषद, प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध के लिए पूरी तरह तैयार


प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए नगर परिषद ने कमर कस ली है जिसके लिए लगतार नगर परिषद द्वारा जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।जिसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। काफी संख्या में दुकानदारों एवं शहरवासियों ने प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग करना लगभग बंद कर दिया है, जिसे एक सकारात्मक उपलब्धि मानी जा रही है। नगर कार्यपालक पदाधिकारी डॉ अमित कुमार ने बताया कि वन एवं पर्यावरण विभाग की गजट अधिसूचना के मुताबिक 22 दिसंबर को 60 दिन की अवधि पूरी होने के कारण अब 23 दिसंबर से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगेगा ।तब तक नगर परिषद द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाता रहेगा। उन्होंने बताया कि नगर प्रबंधक मो. शफी अहमद को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। शहर में चार- चार सदस्यीय टीम बनाए गए हैं ।एक टीम सिटी मिशन मैनेजर उज्जवल गौरव के नेतृत्व तथा दूसरी टीम सिटी मिशन मैनेजर कुश कुमार के नेतृत्व में घूम रही है, जो दुकानदारों एवं गृहस्वामियों से मिलकर उन्हें पॉलिथीन पर लगने वाले प्रतिबंध के बारे में बता रही है तथा उसका उपयोग किए जाने पर किए गए दंडात्मक प्रावधान व जुर्माना के बारे में उन्हें बताया जा रहा है।जागरूकता रथ सभी वार्डों में निकाला गया है। पंपलेट एवं बैनर के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। होर्डिंग- बैनर लगाया जा रहे हैं।यानी पूरा प्रयास है कि 23 दिसंबर के पहले लोगों को पॉलिथीन से होने वाले दुष्प्रभाव तथा पॉलिथीन प्रतिबंधित होने के बाद होने वाले कार्रवाई के बारे में पूरी तरह अवगत कराया जा सके।

स्वयं सहायता समूह के सदस्य करेंगे प्रेरित :

स्वयं सहायता समूह के गठन सराहनीय पहल है ।समूह से जुड़ी महिलाओं को स्व रोजगार प्राप्त हो सकेगा और सही मायने में स्वयं सहायता समूह के गठन के उद्देश्य की पूर्ति होगी।साथ ही कुटीर उद्योग को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
नगर कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की बैठक कर उन्हें झूठ कपड़ा व पेपर का झूला कागज का बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा तथा उन्हें कहा जाएगा कि वह भी आम लोगों को प्रेरित करें, ताकि आम लोग प्लास्टिक प्रतिबंधित होने के बाद इसके वैकल्पिक उपायों को अपनायें।जूट, कपड़े का थैला बनाने तथा कागज का ठोंगा बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को प्रेरित करते हुए उन्हें सरकार की ओर से 10-10 हजार रुपये की सहयोग राशि भी प्रदान की जायेगी,ताकि जूट, कपड़ा व कागज खरीदकर झोला व ठोंगा का निर्माण कर सकेंगे।

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