सूर्योपासना का बहुत बड़ा केंद्र रहा है दादर

आलेख :संतोष अमन।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि सूर्योपासना का मुख्य केंद्र बिहार का मगध क्षेत्र रहा है ।मगध के आसपास आज भी सूर्य मंदिरों कि मौजूदगी अधिक है।मगध तीन शब्दों के युग्म से बना है ,विद्वानों का मत है कि म शब्द मकर के लिए प्रयुक्त हुआ है, और मकर सूर्य का एक नाम है, ग का तात्पर्य गमन से है और ध का तात्पर्य धारण करना या ध्वज से है।जिस धरती के लोग सूर्य की ओर ध्वज लेकर गमन करने कि चेष्टा करे वह मगध है।मगध के सारे सम्राटों ने अपने से दक्षिण अर्थात विषुवत रेखा की ओर विजय पताका फहराया जिस पर सूर्य निशान बने रहते थे।सामाजिक कार्यकर्ता वेंकेटेश शर्मा ने बताया कि मगध शासक चंद्रगुप्त मौर्य ने अपना प्राण मगध से दक्षिण कर्णाटक के श्रवणबेलगोला में त्यागा जो मकर रेखा से नजदीक पड़ता था।भगवान विष्णु आदित्य परिवार के देवता माने जाते हैं एवं शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि भगवान विष्णु का शरीर मगध क्षेत्र में गया एवं सोन नदी के मध्य बताया जाता है जिसमें गया में भगवान विष्णु का सर एवं सोन तट पर विष्णु का पैर है।ग्राम दादर की अवस्थिति गया एवं सोन के मध्य होने के कारण देश के प्रख्यात पुरतात्विद प्रोफेसर आनंद वर्धन ने नाभि पर स्थित बताया था एवं सूर्यस्तम्भ स्थापित तालाब को कमल पुष्करिणी बताया था।
बसाया गया था लेकर वास्तुशास्त्र के सहारा :
दादर से प्राप्त होने वाले मिट्टी के बर्तन के अवशेषों को देखकर बिहार पुरातत्व विभाग के प्रदेश उप निदेशक डॉ अनंत आसुतोष द्विवेदी ने लगभग चार हजार साल का बताया था।एवं गांव का भ्रमण करने के बाद गांव के किलेबंदी एवं मंदिर होने की संभावना व्यक्त किया था।अगर ग्राम दादर की बसावट को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि दादर को वास्तुशास्त्र के सहारा लेकर बसाया गया था क्योंकि दादर के पुरवोत्तर भाग में पवित्र तालाब स्थित है जो जल देवता का स्थान है।इस तालाब की लंबाई लगभग चार सौ मीटर लंबा एवं 200 मीटर चौड़ा है।जो मिट्टी के गाद भरने के कारण उथला हो गया है ।तालाब की लंबाई पूर्व पश्चिम दिशा में है जो तालाब को सूर्योमुखी बनाता है प्रायः ऐसा तालाब देखने को नहीं मिलता है।वेंकटेश शर्मा ने बताया कि इस पवित्र स्थान का दर्शन करने कर्नाटक, महाराष्ट्र से लोग भी आए।महाराष्ट्र के रहने वाले सुनील देवधर जो अभी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बने ने भी दर्शन किया एवं उनकी मनोकामना पूर्ण हुई।ऐसा देखते हैं कि कोई व्यक्ति कुछ इच्छा लेकर यहाँ आया तब उसकी मनोकामना अवश्य पूरी हुई।कर्णाटक के गोकर्णी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राघवेश्वर भारती ने कहा था कि यह स्थान अब जाग्रत हो गया है एवं यह स्थान अपने पुराने वैभव को दुबारा प्राप्त करने वाला है।वेंकेटेश शर्मा ने बताया कि डॉ जमील अहमद जिन्हें राम वन गमन मार्ग खोजने के लिए उप निदेशक बनाया गया है वे भी दादर आने कि अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

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