कलश यात्रा के साथ जलभरी यात्रा निकाली गई

बुधवार की सुबह जय माता दी कि जय घोष गूंजने लगा। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।यह नजारा कलश यात्रा का था।
कलश यात्रा के साथ जलभरी यात्रा निकालकर श्रद्धालुओं द्वारा जलभरी की गई और कलश स्थापित करते हुये शारदीय नवरात्र पाठ की प्रारंभ की गई। विभिन्न पूजा समितियों के तत्वाधान में जलभरी जलभरी यात्रा में शामिल महिला पुरुष श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ कतार बद्ध होकर सोन नदी ,सूर्य मंदिर तालाब या अपने समीपवर्ती तालाबों में पहुंचे और मंत्रोच्चार के बीच जलभरी की गई तथा वहां से वापस लौटने के बाद वापस पूजा स्थल पर पहुंचे, जहां कलश स्थापना की गई।कुछ पूजा समितियों द्वारा निकाली गयी जलभरी यात्रा सोन नदी के काली स्थान घाट पहुंचकर जलभरी किया गया तो कुछ पूजा समितियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा सोन नदी के सोनपुल घाट या सूर्य मंदिर तालाब पहुंचकर जल भरी की गई।चावल बाजार स्थित सुमिरन साव धर्मशाला में रौनियार वैश्य समाज द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है ।यहां से श्रद्धालु काली स्थान घाट पहुंचे और जलभरी की गयी.पुराना शहर संगत के श्रद्धालुओं ने भी काली स्थान घाट पहुंचकर जलभरी की। पुराना शहर की दो पूजा कमेटियों ने सोनपुल घाट पहुंचकर जलभरी की ।वहीं बाजार की विभिन्न पूजा समितियों द्वारा भी काली स्थान घाट ,सूर्र मंदिर तालाब पहुंचकर जलभरी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलपरी यात्रा के साथ जलभरी करते हुये कलश स्थापना की गई. भखरुआं गांव के पूजा कमेटी एवं मौलाबाग स्थित पूजा कमेटी द्वारा भी काली स्थान घाट से जलभरी की गई।शमशेर नगर बाजार में श्री दुर्गा नाटक कला संगम नवयुवक संघ द्वारा जलभरी यात्रा निकाली गई।मखमुल पुर बड़का बिगहा गांव में भी कलश यात्रा निकालकर जलभरी किया गया। ग्रामीण सचिन यादव ने बताया कि यहां हर वर्ष ग्रामीण धूमधाम से पूजा पाठ करते हैं।
देवदत्त पुर गांव में भी नवरात्रि उत्सव की शुरुआत जलभरी के साथ की गई ।बताया गया कि इस वर्ष मां दुर्गा की संगमरमर की की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। 

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