झोला छाप डॉक्टर से बचे

संतोष अमन की रिपोर्ट:-

      तेज बुखार के साथ साथ उलटी व् कंपकंपी से पीड़ित रोगी को कभी भी झोलाछाप डॉक्टर,ओझा,मौलवी व् बाबा के पास कभी भी नहीं भेजें वर्ना रोगी के जान को खतरा हो सकता है व् जान जा सकती है । तेज बुखार से पीड़ित रोगी को प्राथमिक उपचार के तौर पर ठंडें पानी की पट्टी दें और उसे अतिशीघ्र निकटतम सरकारी अस्पताल भेजें जिससे यथाशीघ्र उसकी जान बचायी जा सके ।

     उपरोक्त बातों की जानकारी पाथ के प्रखंड मॉनिटर अरविन्द कुमार सिन्हा ने स्थानीय ठाकुर टोला व् कुचा गली स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 143 व् 144 पर आयोजित सामुदायिक बैठक में सामुदायिक महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य व मच्छरजनित ए. इ. एस. बीमारियों मलेरिया,डेंगू,चिकनगुनिया,मस्तिष्क ज्वर,जीका वायरस व् रोटा वायरस से जागरूक करते हुए हुए बताया कि उपरोक्त सभी बीमारियां गन्दगी से पैदा होनेवाले जीव मच्छर के काटने से होती हे । उपरोक्त सारी बीमारियां मादा मच्छर के काटने से होती है ,परंतु सबसे ज्यादा लाईलाज व् जानलेवा बीमारी मास्तिष्क ज्वर है जिसे दिमागी बुखार भी कहते हैं । यह बीमारी क्यूलेक्स नामक मादा मच्छर के काटने से होती है ।

      बैठक में श्री सिन्हा ने बताया कि दिमागी बुखार के रोगी को तेज बुखार के साथ साथ उल्टी, कँपकँपी, सिरदर्द,बेहोशी,कमजोरी व् सुस्ती होती है,रोगी को मुँह से झाग आता है,दाँत कटकटाता है । हमारे जीवन में मच्छरजनित बीमारियां कभी नहीं हो इसके लिये नियमित तौर पर हमें अपने घर व् उसके आसपास के इलाके सहित नली नाले की साफ सफाई करनी चाहिये,जहाँ तहाँ गन्दगी नहीं करनी चाहिये और खुले में शौच नहीं करनी चाहिये । रात में सोते समय पुरे ढंके हुये कपड़े पहनें व् मच्छरदानी का प्रयोग करें ।

          बैठक में सेविका निर्मला कुमारी,मधु कुमारी व् सहायिका मारो देवी एवं अंजू कुमारी सहित दर्जनों महिलाएं व् किशोरी बालिकाएं मौजूद थीं ।

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