नगर की सफ़ाई भगवान भरोसे, बैठे बिठाए एनजीओ को मिलते थे लाखों रुपए


संतोष अमन की रिपोर्ट:

दाऊदनगर नगर पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जब अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार को प्रशासक बनाया गया तब जाकर अंदरूनी जाँच में यह पता चला कि पिछले छह महीनों से सवक्षता एवं सफ़ाई के निरीक्षक का पद ख़ाली पड़ा हुआ है। शहर की साफ़ सफ़ाई की ज़िम्मेदारी एक एनजीओ के ज़िम्मे है मगर नप की तरफ़ से उनके कार्यों को जाँचने परखने वाले का कोई अता-पता नहीं। कर्मचारियों से पूछताछ में पता चला कि शहर की सफाई के एवज में एनजीओ को करीब सात लाख रूपये का भुगतान नप द्वारा किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक़ अक्षयबर चौबे के जनवरी में ही सेवानिवृत हो चूके थर जिसके बाद आज से करीब दो दिन पहले स्थापना सहायक नरेन्द्र भगत को प्रभार लेने का पत्र मिला है। एसडीओ ने कड़े शब्दों में एनजीओ को भुगतान किए जाने पर ऐतराज़ जताया उन्होंने कहा कि जब स्वच्छता निरीक्षक हैं ही नहीं तो एनजीओ के सफाई कार्यो की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है और किस आधार पर उसे भुगतान किया जा रहा है। एसडीओ ने नप के स्थायी एवं अस्थायी कर्मियों के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी ली और उनके कार्यो के बारे में जानकारी हासिल की।
निरीक्षक रहते हुए भी नागरमें सफ़ाई का स्तर क्या था ओ किसी से परे नहीं है। हैरानी की बात है कि सात लाखर रुपये भुगतान करने के बाद भी सफ़ाई का स्तर इतना नीचा कि बिना निरीक्षन के ही सबको दिखाई पड़े तो क्या निरीक्षक महोदय अपनी ज़िम्मेदारी पर खरे उतरे? सफ़ाई नगरवासियों की मूलभूत सुविधा की चीज़ है और इसमें इतनी बड़ी लापरवाही से अन्य कार्यों के स्तर का भी पता चलता है।

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