अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जन्म जयंती के अवसर पर किया गया पुष्पांजली कार्यक्रम 

दिनांक 11-06-2017 दिन रविवार को शहीद प्रमोद सिंह पथ, महात्मा ज्योतिबा फुलेनगर,दाउदनगर स्थित स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय युवा मंच  के कार्यालय में मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अनुज कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आजादी के महानायक, प्रखर राष्ट्रभक्त,  प्रज्ज्वलित क्रांतिपुंज अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जन्म जयंती के अवसर पर एक पुष्पांजली कार्यक्रम का आयोजन किया गया! संचालन विश्वजीत मिश्रा ने किया! इस अवसर पर राष्ट्रपति पदक विजेता वार्ड पार्षद बसन्त कुमार, युवा समाजसेवी एवं मंच के संस्थापक संरक्षक श्री अजय पांडेय, मंच के प्रेरणाश्रोत दिव्यांग एक्यूप्रेशर चिकित्सक डॉक्टर विकाश मिश्रा, राहुल कुमार, दीपक पाठक, राजनीतिक कार्यकर्ता गणेश कुमार, मंच से जुड़े हुए प्रकाश चन्द्रा मिश्रा, दुर्गेश मिश्रा,अभिषेक कुमार, उमेश चौधरी, आकाश कुमार उपस्थित रहे! सभी लोगों ने बारी बारी से पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें हृदय से नमन किया एवं भारत की आजादी के लड़ाई में उनके महान योगदान को याद किया!कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वार्ड पार्षद बसन्त कुमार ने कहा कि देश पंडित जी की कुर्बानी को कभी नहीं भूल सकता! अजय पांडेय जी ने कहा कि माँ भारती के ऐसे ही अमर सपूतों के कारण देश आजाद हुआ!

 श्री अनुज कुमार पांडेय ने पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि

 जब-जब भारत के स्वाधीनता इतिहास में महान क्रांतिकारियों की बात होगी तब-तब भारत मां के इस वीर सपूत का जिक्र होगा। राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ एक महान क्रन्तिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् व साहित्यकार भी थे। इन्होने अपनी बहादुरी और सूझ-बूझ से अंग्रेजी हुकुमत की नींद उड़ा दी और भारत की आज़ादी के लिये मात्र 30 साल की उम्र में अपने प्राणों की आहुति दे दी। ‘बिस्मिल’ उपनाम के अतिरिक्त वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘सरफरोशी की तमन्ना..’ गाते हुए न जाने कितने क्रन्तिकारी देश की आजादी के लिए फाँसी के तख्ते पर झूल गये। लगभग 11 वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित किया। उनके जीवन काल में प्रकाशित हुई लगभग सभी पुस्तकों को ब्रिटिश सरकार ने ज़ब्त कर लिया था।

इनका जन्म आज ही के दिन

 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम मूलमती था। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खां दोनो में अटूट मित्रता थी! दोनों ने अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करने के लिए काकोरी कांड को अंजाम दिया और अंग्रेजों के पसीने छुड़ा दिए!

 किन्तु तात्कालिक गद्दारों और जयचन्दों की गद्दारी के कारण अपने अन्य साथियों के साथ पकड़ लिए गए! आज जब देश का प्रत्येक कोना धार्मिक भेद-भाव की आग में जल रहा है तब ऐसे समय में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां की अमिट दोस्ती के चरित्र को विद्यार्थियों एवं युवाओं के बीच ले जाना होगा ताकि सभी युवा और विद्यार्थी उन महान बलिदानियों के पथ पर चलकर देशभक्ति की मिसाल कायम करें और भेद-भाव से मुक्त होकर भारत के विकास में अपना योगदान दें ताकि भारत फिरसे विश्वगुरु बने!

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