जनता की आवाज़ : कार्य अवधि के अंदर नहीं हो रहा लोक शिकायत का निष्पादन

                                अक्षय कुमार सिंह

आदरणीय मुख्यमंत्री जी,

मैं आपकी कुशल नेतृत्व, उपयोगी कार्यक्षमता एवं अदम्य साहस के कायल हूँ। जिस तरह से आपने आमजन के हितार्थ एक से बढ़कर एक योजनाओं की शुरुआत कर एक कुशल शासक होने का परिचय दिया है, वहीं दूसरी तरफ बिहार मे पूर्णतः शराब बंद कर अपने अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए बिहार को एक नई दिशा और बुलंद ऊँचाई देने का जो काम किया है वो अपने आप मे एक मिसाल है। मैं आपका ध्यान आपके ही द्वारा लाया गया बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की ओर आकृष्ट कराना चाहता हुँ। यह अधिनियम आम जनता के लिए बहुत ही उपयोगी है, लेकिन दायर किए गये परिवाद मे दिये गये आदेश पर कोई कार्रवाई नही होने से आम जन की समस्या जस की तस बनी रह जाती है। और अपीलीय प्राधिकरण के लिए प्रमंडल मे जाना आम आदमी के बस की बात नही रह जाता है। जिसके कारण समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने अधिकार से वंचित हो जाता है।

उदाहरण के तौर पर समझने हेतू-

मैंने अपना एक निजी मामला लेकर दिनांक 07.02.2017 को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का कार्यालय, जिला- औरंगाबाद मे एक परिवाद दायर किया था, जिसका अनन्य पंजीयन संख्या 434110107021701900 है। इस पर सुनवाई करते हुए सक्षम पदाधिकारी ने अपने अंतिम आदेश मे संबंधित विभाग के सक्षम पदाधिकारी को दोषी करार देते हुए 15 दिनों मे समस्या का निष्पादन करने का निर्देश दिया था, जो कि समय सीमा के अंदर नही किया गया। पुनः इसकी जानकारी लोक शिकायत निवारण कार्यालय को देते हुए उपाय पूछा तो बताया गया कि आपको प्रमंडलीय अपील करने के लिए गया जाना होगा। यह मेरे जिला से लगभग 150 km की दूरी पर है, और जो मेरे लिए संभव नही है। तो समस्या तो ज्यों की त्यों ही रह गई।

मान्यवर आमजन को इससे कोई मतलब नही है कि दोषी कौन है? और क्यो हैं? उन्हें मतलब है तो अपनी समस्या के समाधान से। वह यह नहीं चाहता कि पदाधिकारी द्वारा दोषी को किसी भी प्रकार का कोई दण्ड मिले। परंतु वह यह भी नही चाहता कि अपील करने हेतू उसे दर-दर की ठोकरें खानी पड़े। इसलिए जरूरत है इसे सख्ती से पालन करवाने की और न्यायसंगत तो तब होगा की अपील मे जाने की आवश्यकता दोषी को हो। या तो समय सीमा के अंदर समस्या का समाधान करें अन्यथा अपील मे जाइये और जिसकी सुनवाई भी गृह जिला मे ही हो। कहने का तात्पर्य की समस्या से ग्रसित व्यक्ति के समाधान उसके घर तक चलकर आये। सही मायने मे तब जाकर बिहार मे बहार आयेगा और विकास की सही परिभाषा सामने आयेगी।

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