बिहार सरकार अपने घोटालों और नाकामी को छुपाने के लिए मासूम बच्चों के भविष्य के साथ कर रही है खिलवाड़,महज़ 30 प्रतिशत बच्चे हुए पास:सौरभ सिन्हा

अभाविप के जिला संयोजक सौरभ सिन्हा ने कहा कि

आज इंटरमीडिएट 2017 की परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया परिणाम इतनी भयावह है जिससे बिहार सरकार की शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई ,इस बार साइंस आर्ट्स और कॉमर्स में महज 30% छात्र-छात्राएं हीं पास हुए हैं, इंटर साइंस स्ट्रीम से 30.11 प्रतिशत, आर्ट्स में 37.13 प्रतिशत एवं कॉमर्स में 73. 76 प्रतिशत रिजल्ट हुआ है जो बेहद ही शर्मनाक और शिक्षा की पोल खोलती नजर आ रही है ,वही बिहार बोर्ड के खराब प्रदर्शन को देखते हुए प्रिंसिपल सेक्रेटरी ऑफ एजुकेशनल डिपार्टमेंट आर के महाजन ने कहा कि इस बार कॉपी कड़ी जांच होने की वजह से छात्र -छात्राएं भारी मात्रा में फेल हो गए ,बिहार सरकार के द्वारा छात्रों के साथ काफी ज्यादती की गई है जहां एक ओर पूरे बिहार की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है ,स्कूल कॉलेजों की स्थिति बिल्कुल खराब हो चुकी है ,कई स्कूलों में तो कई कई महत्वपूर्ण विषयों साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स में शिक्षकों की घोर कमी है ,वहीं विद्यालय का भवन ना होने के कारण या जर्जर होने के कारण विद्यालय में नियमित कक्षा का संचालन भी नहीं होता, नहीं छात्राओं के विद्यालयों में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं दी गई ,ना तो विद्यालयों में पुस्तकालय की व्यवस्था थी तो फिर सरकार यह बताएं कि इन अभाव में पढ़ने के बाद बिहार के बच्चे कैसे पास करेंगे और असफल हुए बच्चों के भविष्य का क्या होगा और उसका जिम्मेवार कौन है ? जबकि परीक्षाओं में पूर्णता कदाचारमुक्त अभियान चलाया गया, बिहार के शिक्षा मंत्री यह बताएं कि आपने परीक्षाओं में तो खुद जाकर परीक्षा को कदाचार मुक्त बनाने की पूरी प्रयास किए किंतु आप कभी उन विद्यालयों में क्यों नहीं गए जो अभावग्रस्त है ,आपने शिक्षकों की कमी को पूरा क्यों नहीं किया, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई, पुस्तकों की व्यवस्था क्यों नहीं कराई गई और विद्यालयों में नियमित कक्षा संचालन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई ,यदि यह सभी सुविधाएं देने में सरकार असमर्थ थी तो फिर परीक्षा को कदाचार मुक्त बनाने का क्या  मतलब। विद्यार्थी परिषद औरंगाबाद के कार्यकर्ताओं ने बीते वर्ष 2016 में जिले के लगभग सैकड़ों विद्यालयों में जाकर समस्या संग्रह किया था जिसमें उपरोक्त असुविधाओं को पाया गया था और इसकी सूची बना कार्यकर्ताओं ने शिक्षा पदाधिकारी को भी इन  असुविधाओं से अवगत कराया था फिर भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई तो फिर बच्चे किस  परीस्थिति में पास करेंगे ।हमारे बिहार के लिए बेहद शर्मनाक है कि जिस बिहार को कभी नालंदा ,उदवंत पुरी और तक्षशिला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता था उस  बिहार को आज लालकेश्वर और परमेश्वर कांड के नाम से जाना जाता है यही नहीं इसके बाद भी लगातार कई ऐसे घोटाले और दिख रहे हैं।सत्ताधारी सरकार के मंत्री विधायक से लेकर आला अधिकारी तक शामिल हैं उन पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई आखिर बिहार सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए इन भोले-भाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना कब बंद करेगी ? इसे  देखते हुए विद्यार्थी परिषद अब पूरे बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन की शुरुआत करेगी और सरकार से सही शिक्षा की मांग करेगी।

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