ख़तरनाक रैन्समवेयर से आप ऐसे बच सकते हैं


रैन्समवेयर कई वर्ष पुराना है जिसकी शुरूवाती झलक रूस में देखने को मिली थी। इसकी संरचना ट्रोजन पर आधारित है जो वाक़ई ख़तरनाक माना जाता है। हमारे कम्प्यूटर को नुक़सान पहुँचाने के लिए वाइरस, स्पाईवेयर, मालवेयर के साथ साथ साइबर सेक्यूरिटी की दुनिया में अब चर्चा का विषय बना है रैन्समवेयर। और हो भी क्यूँ ना? रैन्समवेयर बहुत ख़तरनाक है, उम्मीद से भी ज़्यादा। Ransom (रैन्सम) का मतलब फिरौती है जो बिलकुल आम फिरौती की तरह काम करता है। रैन्समवेयर का निर्माण फिरौती के मक़सद से हुआ था जो आपके कम्प्यूटर के डेटा को लॉक कर देता है और उसे खोलने के लिए आपसे उसकी क़ीमत माँगी जाती है। जितना क़ीमती आपका डेटा फिरौती की रक़म उतनी ऊँची।

12 मई 2017 से एक नया रैन्समवेयर चर्चा में आया है जिसका नाम “वाना-क्राई” है और इसकी चपेट में दुनिया के तक़रीबन 150 देशों के तीन लाख से ज़्यादा कम्प्यूटर आ चुके हैं। यह रैन्समवेयर आपके कम्प्यूटर के डेटा को एंक्रिप्ट कर देता है और आपके डेटा को वापस खोलने मतलब डीक्रिप्ट करने के लिए कोड(की) चाहिए होता है जिसे पाने के लिए आपसे रुपये माँगी जाती है। फिरौती की रक़म $300 से लेकर $600 बतायी जा रही है जिसकी क़ीमत भारतीय मुद्रा में 19,000 से 39,000 रुपये आँकी गई है। फिरौती की रक़म चुकाने के लिए आपको बिटकोईन का सहारा लेना पड़ेगा। आपको बता दें की बिटकोईन दुनिया की सबसे पहली डिजिटल करेन्सी है और एक बीटकोईन की क़ीमत एक लाख रुपये से भी ज़्यादा है।

वाना-क्राई का हमारे देश में प्रभाव: 

दुनिया के कई देशों के साथ साथ यह रैन्समवेयर हमारे देश में भी कई कम्प्यूटर सिस्टम को प्रभावित कर चुका है। यही कारण है कि सरकार को तत्काल एटीएम सेवा को कुछ दिनों के लिए बंद कराना पड़ा। देश में ज़्यादातर एटीएम विंडोज़ के पुराने वर्ज़न ख़ासकर विंडोज़ एक्सपी पर चलते हैं जिसका सपोर्ट माइक्रसॉफ़्ट ने 2 वर्ष के पहले से ही बंद कर दिया था। किसी भी वाइरस का प्रभाव विंडोज़ आधारित सिस्टम पे ज़्यादा पड़ता है और अगर विंडोज़ एक्सपी हो तो फिर क्या कहना।

कैसे फैलता है ये रैन्समवेयर?

एक वाक्य में कहा जाए तो इसका सबसे अच्छा श्रोत इंटर्नेट है। इंटर्नेट के माध्यम से किसी भी फ़ाइल को किसी भी कम्प्यूटर तक पहुँचाना जितना आसान है उतना ही आसान वाइरस या रैन्समवेयर को भी। ईमेल, सोफ़्टवेयर, गेम, मूवी, गाना, फ़ोटो इत्यादि के साथ रैन्समवेयर फ़ाइल को अटैच कर लोगों तक फैलाया जाता है जो हमें दिखाई नहीं देता। अगर यह फ़ाइल किसी कम्प्यूटर में हो तो उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले पेनड्राइव तथा नेट्वर्क में जुड़ी हुई और कम्प्यूटर भी ग्रसित हो सकती है। इस प्रकार बहुत तेज़ी से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर तक फैलता चला जाता है यह रैन्समवेयर।
रैन्समवेयर से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • विंडोज़ एक्सपी का इस्तेमाल ना करें
  • ऑपरेटिंग सिस्टम तथा सॉफ़्टवेयर को हमेशा अप्डेट करें
  • अनजाने द्वारा भेजें गए फ़ाइल को डाउनलोड ना करें
  • मनलुभावनी ईमेल को खोलने से बचें
  • ख़रीदा हुआ एंटीवाइरस और इंटर्नेट सेक्यूरिटी का इस्तेमाल करें
  • फ़ायरवॉल को सक्रिय रखें
  • पायरटेड सॉफ़्टवेयर के इस्तेमाल से बचें
  • पोर्नोग्राफ़िक वेब्साइट से बचें
  • अगर कोई कम्प्यूटर किसी वाइरस अथवा रैन्समवेयर से प्रभावित हो गया हो तो उसे तुरंत इंटर्नेट से अलग करें, अगर ओ कम्प्यूटर लोकल नेट्वर्क में हो तो उसे नेट्वर्क से बाहर करें
  • फ़ोटो, विडीओ, गाना इत्यादि को बुधिमानी से डाउनलोड करें
  • अपने बहुमूल्य डेटा का बैकप कहीं और सुरक्षित कर के रखें: पेन ड्राइव, इक्स्टर्नल हार्डडिस्क, गूगल ड्राइव, ड्रॉपबॉक्स, वन ड्राइव इत्यादि का इस्तेमाल कर अपने डेटा की एक कापी अवश्य रखें
  • वेब ब्राउज़र के तौर पर क्रोम या फ़ायरफ़ॉक्स का इस्तेमाल करें
  • यूसी ब्राउज़र के इस्तेमाल से बचें
  • अनजाने जगह पर फ़्री वाईफ़ाई के इस्तेमाल से बचें

इसके अलावा अगर आप साइबर कैफ़े या कम्प्यूटर इन्स्टिटूट के मालिक हों तो इन बातों का भी ख़याल रखें:

  • दूसरों के लिए अलग यूज़र लोगिन बनाएँ और उसे लिमिटेड ऐक्सेस दें। लिमिटेड ऐक्सेस देने से आपके कम्प्यूटर में उस यूज़र के द्वारा जाने अनजाने में कोई सोफ़्टवेयर इंस्टॉल नहीं हो पाएगा। महत्वपूर्ण फ़ोल्डर का ऐक्सेस लिमिटेड यूज़र को ना दें। 
  • यूएसबी पोर्ट को बंद कर दें ताकि आपके कम्प्यूटर में पेन ड्राइव से कोई डेटा ना डाल पाए, ज़रूरत पड़ने पर आप किसी एक कम्प्यूटर में पेन ड्राइव का ऐक्सेस रखें जिसका इस्तेमाल आप कर रहे हों और उसमें प्रटेक्शन की सारी व्यवस्था उपलब्ध हो।
  • वाइरस से प्रभावित वेब्साइट को ब्लाक कर के रखें।

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