शूक्रवार को मनेगा परशुराम जयंती।


 आचार्य पं.लालमोहन शास्त्री ने बताया है कि भगवान् परशुराम जयन्ती प्रदोष काल में तृतीया तिथि होने के कारण शुक्रवार को ही मनाई जायेगी।  वे श्रीमन्नारायण के आवेशावतार हैं, वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया तिथि को माता रेणुका के गर्भ से दमदग्नी ऋषि के पुत्र के रूप में जन्म हुआ था। इनका अवतार अत्याचार को समाप्त कर सुख शान्ति व धर्म स्थापना हेतू हुआ था।  पुत्रोत्पति के निमित जो प्रसाद इनकी माता को मिला था वह भगवत्लीला के कारण बदल गया था। फलत: रेणुका पुत्र परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रीय स्वभाव के रहे। जबकि विश्वामित्र क्षत्रिय कुल के होकर भी ब्रह्मर्षि हो गये। शिव के दिए हुए अमोघ अस्त्र फरशा धारण करने के कारण परशुराम नाम पडा।

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