भावनाओं से बड़ा होता है कर्तव्य 

प्रवचन करतीं उषा रामायणी

संतोष अमन की रिपोर्ट:-

श्रीरामचरितमानस यज्ञ समिति द्वारा आयोजित प्रवचन में अंतिम दिन चित्रकुट से आयीं कथावाचक उषा रामायणी ने भगवान श्री राम और भरत मिलाप की सप्रसंग संगीतमय वर्णन करते हुये कहा कि भावनाओ से बडा कर्तव्य होता है। मनुष्य को कर्तव्य का निर्वाहन करना चाहिए न कि भावनाओं के प्रभाव में आकर कर्तव्य को भूलना चाहिए। भरत का राज्याभिषेक हो चुका होता है। इसके बावजूद यह भाई का ही प्रेम था कि वे वन जाकर भगवान श्री राम से अयोध्या वापस चलने की विनती करते हैं। इनके साथ इनकी माता, गुरू और अयोध्यावासी होते हैं। इससे ज्ञात होता है कि राजा के प्रति जनता का लगाव किस हद तक होता है। 12 वर्षो तक चित्रकुट में रहने के बाद भगवान श्री राम अपना वनवास काटने के लिए आगे की ओर रवाना होते हैं। वहां से पंचवटी गये जहां सीता जी का हरण हुआ। वहां से आगे बढने पर शबरी एवं अन्य  ऋषि मुनियों का दुख दूर करते हुये आगे की ओर बढते हैं और रावण का संहार करते हैं। लंका में विभीषण को राजगद्दी सौंपते हैं। अयोध्या आकर अयोध्या में राम राज की स्थापना करते हैं। सुलेखा रामायणी एवं रम्भा कुमारी द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया। 

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