राजसिंहासन के लिए पुरूषार्थ जरूरी

संतोष अमन की रिपोर्ट:

हसपुरा प्रखंड के मौआरी गांव में आयोजित श्री भागवतकथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुये बाराह पीठाधीश स्वामी पुरूषोतमाचार्यजी महाराज ने कहा कि राजसिंहासन के लिए पुरूषार्थ जरूरी है। इस पर बैठे व्यक्ति को साम, दंड, नीति का भी प्रयोग करना चाहिए। राजा राष्ट्र की रक्षा करे। प्रजा के साथ प्रेम, भाईचारा रखे एवं उनकी इच्छाओं का सम्मान करे तभी राज्य में शांति, वैभव आ सकती है। कथा के दरम्यान राजा भरत का जिक्र करते उन्होंने कहा कि ऋषभदेव के सौ पुत्र थे, जिनमें भरत सबसे बडे थे। उन्होंने प्रजा को सुख शांति प्रदान करते राज्य को उन्नति के मार्ग पर लाया। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ उतराखंड में चर्तुमास यज्ञ का आयोजन किया गया है। जो आसाढ़ मास से आरंभ होकर आश्विन मास तक चलेगा। उन्हीं के नाम पर इस भू-खंड का नाम भारतवर्ष पड़ा। कार्यक्रम में यज्ञ समिति के लोगों के अलावा रविंद्र कुमार शर्मा एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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