कृषि उपज घास के मोल बेचने को मजबूर हैं किसान

कन्वेंशन में उपस्थित भाकपा माले नेता रामाधार सिंह एवं अन्य

संतोष अमन की रिपोर्ट:

कृषि में संकट पैदा करने के लिए शासक वर्ग व सरकार जिम्मेवार है। जो नीतियां बन रही हैं वह कृषि को संकट में डालने वाली नीतियां हैं। खेती में लगने वाले संसाधन महंगे हो गये हैं। कृषि उपज घास के मोल बेचने को किसान मजबूर हैं। उक्त बातें भाकपा माले राज्य स्थायी समिति सदस्य एवं अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सचिव काॅ. रामाधार सिंह ने भाकपा माले के अनुमंडल पार्टी कार्यालय में अखिल भारतीय किसान महासभा ग्रामीण खेत मजदूर सभा द्वारा आयोजित कन्वेंशन में कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार जो रेट तय करती है वह लागत मूल्य से भी बहुत कम होता है। बटाईदारों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन वे किसान की तरह सुविधा से वंचित हैं। बड़े पैमाने पर खेती योग्य भूमि को गैर खेती भूमि में तेजी से बदला जा रहा है।

भाकपा माले के जिला सचिव जनार्दन प्रसाद सिंह ने कहा कि चम्पारण भूमि संघर्ष के एक सौ वर्ष पूरा होने पर पूरे बिहार में अनुमंडल कार्यालयों पर 25 से 31 मार्च तक अनशन आयोजित किया जाएगा। जिले के औरंगाबाद अनुमंडल में 29 मार्च व दाउदनगर अनुमंडल कार्यालय के समक्ष 30 व 31 मार्च को अनशन किया जाएगा। 22 मार्च को पूरे बिहार में प्रतिवाद दिवस आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत भखरूआं मोड़ पर नुक्कड़ सभा की जाएगी। 24 मार्च को अनुमंडल पदाधिकारी से शिष्टमंडल मिलकर ज्ञापन सौंपेगी। कन्वेंशन को खेग्रामस के जिला सचिव राजकुमार भगत, किसान महासभा के जिला सचिव कामता यादव, चंद्रमा पासवान, मदन प्रजापति, मुनारिक राम, धर्मेन्द्र कुमार, बिरजु चैधरी, रमेश पासवान, प्रेमचंद पासवान, सरयू प्रजापति, मुन्ना मेहता, सुदामा सिंह, रामप्रवेश यादव ने भी संबोधित किया।

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