होली को लेकर शहर में बढ़ती जा रही रौनक

मों मनसूर आलम की रिपोर्ट:

मैट्रिक परीक्षा का खत्म होना तथा पुलिस प्रशासन के द्वारा वाहनों को बाजार में नो इंट्री होने से दाउदनगर शहर का बाजार थोड़ा सन्नाटा पसरा हुआ दिखाई पड़ा। हालांकि मैट्रिक की परीक्षा खत्म होते ही लोगों मे होली की खुमारी बाजार से लेकर बच्चों व बुढ़ो के सर पर चढ़ने लगी है। होली का त्यौहार में अभी कुछ दिन ही बाकी है। रंग, गुलाल, अबीर संग विभिन्न तरह की पिचकारियों के साथ साथ पटाखों की दुकानें भी सज गई है। बच्चे अपने-अपने स्कूल में अपने साथियों संग होली का त्यौहार मनाते दिखाई पड़ रहे हैं।

इस साल 13 मार्च को होली है। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है, बाजारों में रौनक बढ़ती जा रही है। होली पर्व को लेकर दुकानदार भी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।  खरीददारों की भीड़ से बाजार गुलजार दिखने लगे हैं। खासकर कपड़े के बाजार में होली की रौनक कुछ अधिक ही दिख रही है। हर तरफ होली की खरीदारी शुरू हो गई है। महिलाएं जहां रसोई की खास तैयारी में जुटी हैं, वहीं युवा इस त्योहार को लेकर आकर्षक डिजाइन के कपड़ों की खरीदारी में व्यस्त हैं। शहर के बाजार में विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगी पिचकारियां बच्चो को खुब लुभा रही है, जिससे बच्चे आकर्षित हो खींचे चले जा रहे हैं। बुधवार को सुबह से ही बाजार में रौनक दिखाई दी। वहीं कई जगह हास्य कवि सम्मेलन तो कहीं  होली मिलन समारोह कर उत्साह बढ़ा रहे हैं।

भारतीय स्टेट बैंक के समीप स्थित सगुन किराना दुकान के मालिक संजय गुप्ता ने बताया कि हर्बल युक्त रंग और अबीर ही लोग इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा को कोई नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि ज्यादा मुनाफा कमाने के फेर में कुछ दुकानदार लोगो के जिंदगी से खेलते है। वे ऐसे भी रंगों की बिक्री करते है, जो केमिकलयुक्त है और बच्चों के त्वचा के लिए खास नुकसानदायक साबित होता है। इन केमिकलयुक्त रंगों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई अभियान नहीं चलाया जा सका है। नतीजा यह है कि इस प्रकार के रंगों की बिक्री चोरी चुपके की जा रही है। श्री गुप्ता ने बताया कि लोगो को जागरूकता होने की जरूरत है।

चिकित्सक डॉ विमल ने बताया कि रंग शरीर के जिस भाग पर पड़ते हैं, उस स्थान की त्वचा झुलस सकती है। ऐसे में उस प्रकार के रंगों का प्रयोग करने की बजाय हर्बल रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि होली खुशी का पर्व है। इसलिए कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो।

जानकारी के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाला हर्बल रंग 80 रुपये से 150 रुपये तक बाजार में उपलब्ध है। विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष रंग व अबीर-गुलाल के दामों में 7 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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