प्राथमिक शिक्षा सुधारे बिना शिक्षा का विकास नहीं – मंत्री

संतोष अमन की रिपोर्ट:

आर्यभट्ट कोचिंग सेंटर द्वारा आयोजित पूर्व मंत्री व स्वतंत्रता सेनानी रामनरेश सिंह जयंती समारोह, मंगलाशीष कार्यक्रम एवं महात्मा गांधी और शिक्षा विषय पर आयोजित परिचर्चा का उदघाटन करते हुए बिहार सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि गांधीजी की चंपारण यात्रा का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। जब तक बिहार में प्राथमिक शिक्षा में सुधार नहीं आएगा, तब तक शिक्षा का विकास नहीं होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी का सपना था कि गांव के पाठशाला में पढ़कर देश को महान बनाएं। केंद्र में यूपीए की सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान शुरु किया था। राज्य सरकार ने उसे लागू किया। बजट का चालीस प्रतिशत सरकार शिक्षा पर खर्च करती है। गांधी का जितना सपना था और सरकार जितना चाहती है, उसे हम पूरा नहीं कर पा रहे। प्राथमिक, मध्य व उच्च विद्यालयों का सुदृढ़िकरण कर गांधी जी के सपने को साकार कर सकते हैं।

शिक्षाविद डॉ अनील कुमार ने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली मैकाले की सोंच पर आधारित है। गांधी जी ने नई तालीम की सोंच दी थी।जब तक ज्ञान व कर्म का रिश्ता एक साथ नहीं जुटेगा, तब तक गरीबी बेरोजगारी दूर नहीं होगी। विनय कुमार कंठ ने कहा कि गांधीजी ने नैतिकता व चरित्र निर्माण पर बल दिया। नैतिक शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके जीवन का मूल मंत्र उनकी शिक्षा प्रणाली थी।

जन शिक्षा विभाग बिहार के सहायक निदेशक मो. गालीब खान ने कहा कि गांधीजी के साथ शिक्षा को जोड़कर देंखे तो बगैर उन्हें जाने समझे पढ़े कल्पनाओं पर आधारित शिक्षा नहीं हो सकती। कुमार संजीव ने कहा कि गांधीजी की सोच वैसी शिक्षा थी, जिससे समाज का अंतिम व्यक्ति तक लाभांवित हो। अवकाशप्राप्त प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार उर्फ उमा बाबू, गौरीशंकर सिंह, डा.विनोद कुमार सिंह, मधुबाला वैद्य, पत्रकार सत्येंद्र कुमार, उपेंद्र कश्यप, ओम प्रकाश गुप्ता, फिल्म निर्देशक धर्मवीर भारती ने भी संबोधित किया। संचालन प्रधानाध्यापक रामाकांत सिंह एवं शिक्षक प्रहलाद प्रसाद गुप्ता ने किया। अतिथियों का स्वागत निदेशक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किया।वक्ताओं ने पूर्व मंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी रामनरेश सिंह के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।

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