भारतीय सभ्यता व संस्कृति का अपमान नही करेंगे बर्दास्त-अभाविप


आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद औरंगाबाद के छात्राओं ने चित्तौड़ की रानी पद्मावती की की साहस, बलिदान और त्याग का फिल्म के माध्यम से मजाक बनाने एवं उनके चारित्रिक इतिहास को धूमिल करने को लेकर फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली का खुलकर विरोध किया ।छात्रा कार्यकर्ताओं ने कहा कि रानी पद्मावती की जीवन साहस, बलिदान एवं त्याग की गौरव गाथा है ,उनके जीवन को आज भी राजस्थान में पढ़ाया जाता है, उनकी गौरव को बताया जाता है,, और देश दुनिया से आने वाले पर्यटकों को चित्तौड़गढ़ के किले में वह स्थान दिखाएं जाते हैं जहां चित्तौड़ की 16000 महिलाओं ने अपनी अस्मिता को बचाने के लिए अपने जीवन का त्याग किया ।अ भा वि प की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आशिका कुमारी ने बताया की जिस प्रकार से हमारे देश में फिल्मों के माध्यम से हमारी देश की सभ्यता, संस्कृति ,त्याग, बलिदान को फिल्म निर्माता मजाक बनाते हैं यह भारत की इतिहास के खिलाफ है। जिस प्रकार से संजय लीला भंसाली जैसे निर्माताओं ने हमारे देश की एक महान गाथा महारानी पद्मावती की चरित्र पर फिल्म के माध्यम से उंगली उठाने का काम किया यह इस देश की महिलाएं कभी बर्दाश्त नहीं करेंगी यदि इसके लिए देश की महिलाओं को भंसाली जैसे देशद्रोहियों पर बार-बार हाथ उठाना पड़े तो उठाएंगे, वही ऐसे देशद्रोही निर्माता को बिहार की महागठबंधन की सरकार के उपमुखिया तेजस्वी यादव एवं राजद सुप्रीमो लालू यादव ने बिहार में आने का निमंत्रण दिया है, यह बिहार की महिलाओं का सरासर अपमान है इसका बिहार की युवा छात्रा शक्ति द्वारा पुरजोर विरोध किया जाएगा एक ओर जहां बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव खुद को यूथ आइकन बताते हैं और फिर खुद इस देश की संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वाले भंसाली जैसे व्यक्ति को आमंत्रित करते हैं इससे इस राज्य के युवाओं का भी घोर अपमान है अगर भंसाली बिहार में आते हैं तो बिहार की महिलाएं उनका विरोध करेंगी । 

किशोरी सिन्हा महिला कॉलेज की अध्यक्ष प्रेरणा सुमन ने कहा की पद्मावती की सुंदरता की चर्चा से मंत्रमुग्ध हो जब अलाउद्दीन खिलजी ने उन्हें पाने की ललक में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया और राजा रतन सिंह को यह संदेश भिजवाया कि वह रानी पद्मावती को अपनी बहन के रुप में मानता है और उनसे मिलना चाहता है तब रानी पद्मावती ने एक शर्त रखी कि मैं अपनी सूरत पानी की परछाई में दिखाऊंगी, चित्तौड़ की सेना जब युद्ध में हारने की कगार पर जा पहुंची थी तो यह सूचना पाकर रानी पद्मिनी ने चित्तौड़ की औरतों से कहा कि अब हमारे पास दो विकल्प है या तो हम जौहर कर ले या फिर विजई सेना के समक्ष अपना निरादर सहें, सभी महिलाओं की एक ही राय थी एक विशाल चिता जलाई गई और रानी पद्मावती सहित चित्तौड़गढ़ की 16000 औरतें उस में कूद गई इस प्रकार से रानी पद्मावती के साथ सभी औरतों ने चिता में कूदकर जोहर किया ऐसी  वीरांगनाओं के चरित्र पर  लांछन हमारे देश की संस्कृति के खिलाफ है जिसे अभाविप कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उपन्यास अलग बात है और इतिहास अलग पारो और रानी पद्मावती में फर्क को समझना होगा हार निश्चित होने के बाद भी 12 साल से ऊपर का हर पुरुष केसरिया साफा बांधकर शाखा व्रत किया था इसे गौरवगाथा से छेड़छाड़ हमें स्वीकार नहीं है।

इस मौके पर निधि,चंचल,नेहा,आराधना,हर्षिता,स्मृति उपस्थित थी।

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