अभाविप दाउदनगर इकाई के द्वारा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई गई

राहुल कुमार की रिपोर्ट:-

दाउदनगर इकाई के द्वारा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई गई। महाराणा प्रताप के तस्वीर पर माल्यार्पण करने के बाद उनकी जीवनी एवं वीरता पर चर्चा की गई। नगरमंत्री चन्दन कुमार व मिडिया प्रभारी सौरभ राजपूत ने कहा कि महाराणा प्रताप सौर्य पुरुष थे। अपने जीवनकाल में घास की रोटी खाना पसंद किया, परंतु मुगलों की अधिनता और गुलामी झेलना पसंद नहीं किया। महाराणा प्रताप की वीरता और स्वाभिमानता तथा देशभक्ति की भावना से अकबर भी बहुत प्रभावित हुआ था। जब मेवाड़ की सत्ता महाराणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाड़ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाड़ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था। राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे और अकबर के सामने आत्मसर्मपण नही किये। जंगल-जंगल भटकते हुए तृण-मूल व घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी व बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। पैसे के अभाव में सेना के टूटते हुए मनोबल को पुनर्जीवित करने के लिए दानवीर भामाशाह ने अपना पूरा खजाना समर्पित कर दिया। तो भी, महाराणा प्रताप ने कहा कि सैन्य आवश्यकताओं के अलावा मुझे आपके खजाने की एक पाई भी नहीं चाहिए। अकबर के अनुसार महाराणा प्रताप के पास साधन सीमित थे, किन्तु फिर भी वो झुका नहीं, डरा नही। 

उनका जन्म 9 मई 1540 एवं मृत्यु 29 जनवरी 1597 को हुआ। अभाविप के नगर सहमंत्री सुमित भारती कॉलेज अध्यक्ष आर्य अमर केशरी ने कहा कि महाराणा प्रताप देश के महान हिंदू शासक थे। महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हल्दी घाटी का युद्ध आज भी विख्यात है। कहा कि महाराणा प्रताप की जीवन से आज हम सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है। कहा कि महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय उनका चेतक था। वह भी काफी बहादुर था। कार्यक्रम में अभाविप के नगर सहमंत्री संतोष अमन, कॉलेज उपाध्यक्ष धीरज कुमार, रोहित कुमार, रवि प्रताप, शशि रंजन, और अभाविप के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

Leave a Reply