प्रधानमंत्री रह चुके थे कभी, अब कर रहें हैं पत्रकारिता

संतोष अमन की रिपोर्ट:

    सच ही कहा है किसी ने जीवन एक सफ़र है। इस चलती जिंदगी के सफर में एहसास भी नहीं होता कि कब हम बड़े हो गये। समय के साथ लगातार दौड़ जारी रहती है और जिंदगी में हो रहे मशक्कत का सामना कर रहे होते हैं। बचपन में प्रधानमंत्री रहकर, अब पत्रकारिता कर रहे एक शख्स, जिन्होंने अपनी लेखनी का इस्तेमाल कर खबरों को हमलोगों के बीच रखा है। चौकिये मत, हम देश के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि विद्यालय में गठित बाल सांसद के प्रधानमंत्री की बात कर रहें हैं।

     जी हाँ, ये वाक्या 90 के दशक की है। दाउदनगर स्थित ठाकुर मध्य विद्यालय में स्वर्गीय मोहन लाल जी प्रचार्य थे, और उसी समय बाल सांसद की परिकल्पना की गई थी। इसकी गठन के बाद बाल सांसद की प्रधानमंत्री के तौर पर ओम प्रकाश को बनाया गया था, जो वर्तमान में प्रभात खबर में पत्रकारिता कर रहे हैं। और साथ ही पुस्तकालय मंत्री के रूप में बसन्त कुमार को बनाया गया था। जानने की कोशिश की तो इसी बाल सांसद द्वारा विद्यालय की गतिविधियों का संचालन किया जाता था। बाल सांसद की सार्थकता तब अधिक समझ में आई, जब नितीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार के सभी विद्यालय में इसे लागु किया गया। अफ़सोस है कि कहीं-कहीं बाल सांसद गठित तो है, लेकिन उसका कार्य रूप नही है। वो केवल कागज़ तक ही सीमित रह चुका है।

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