दाऊदनगर के ऐतिहासिक धरोहर में रौज़ा एक अहम हिस्सा 

पोर्टल के सदस्य शाहिद क़य्यूम ने विशेष रिपोर्ट की शक्ल में दाऊदनगर तथा आसपास की ऐतिहासिक धरोहरों को हम सब के समक्ष रखने का प्रयास किया है। दाऊदनगर तथा आसपास के इलाके में बहुत से ऐसे ऐतिहासिक धरोहर है जिसे हम दाउदनगर के लोग भी बहुत कम जानते हैं। जिस प्रकार हमारा शहर इतिहास को दर्शाता है, कला और संस्कृती के क्षेत्र में विश्व स्तर पर हमारी पहचान दिलाता है, उसी के साथ-साथ हमें नवाबों की बस्ती के होने का गौरव भी दिलाता है। हम में से ज़्यादातर लोग आजतक सिर्फ दाउदनगर में स्थित क़ीला की ही बात करते आ रहे हैं मगर हमारी टीम ने अपने हेरिटेज तथा पौराणिक स्थल को उजागर करने के मंसुबो के साथ जिस प्रकार आगे बढ़ना जारी रखा है उसी श्रृंखला के अंतर्गत आज हुसैनी-बाजार के कब्रस्तान के पूरब दिशा में स्थित एक रौज़ा की बात आपके समक्ष रखने का प्रयास है।


हमारे शहर के बुजुर्ग लोगों से इस रौज़े के बारे में पूछने पर मालुम पड़ता है के इस रौज़े के अंदर जो कब्र है वो नवाब दाऊद ख़ाँ के छोटे भाई की है। वाकई इस रौज़े को देखने पर ऐसा लगता है के इतनी खूबसूरत और नायाब मक़बरा कोई नवाब की ही  हो सकती है।

भारतीय इतिहास में नवाबों, राजा-महाराजाओं के मरने के बाद उनकी कब्र को एक खूबसूरत सा रौज़ा का रूप दे दिया जाता था, जिसे आने वाली पीढ़ी देख सकें। ताजमहल, शेरशाह का मकबरा, हुमायूं का मकबरा आदि सब रौज़ा का ही रूप है जिसकी नयाब कलाकृतियां को देखने देश-विदेश से लोग आते हैं और इसका फायदा पर्यटन विभाग के जरिये सरकारी खजाने में जाता है।

जरुरत है तो बस हमारे शहर के ऐतिहासिक धरोहरों की सौंदर्यीकरण कराने की और इसकी ऐतिहासिक तथ्य को संग्रहित करने की, ताकि हमें भी घुमने कहीं दूर जाना जरूरी न लगे।  हमारी आने वाली नस्ले हमारे दाउदनगर का इतिहास जान सके।

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