जनता की आवाज : जमीन के अभाव में स्थानांतरित हुए कई विद्यालय

 सतीश पाठक - कंप्यूटर शिक्षक

सतीश पाठक – कंप्यूटर शिक्षक

याद है जब हम बचपन के दिनों में मौलाबाग न्यू एरिया में जाते थे, तो रास्ते मेें पंक्तिनुमा कुछ कमरा दिखाई पड़ता था। जिसे हम हरिजन होस्टल के नाम से जानते थे तथा उस होस्टल में एक विद्यालय भी चला करता था, जो आज के परिवेश में उक्त स्थान पर न रहा। प्रश्न है कि आखिर उस विद्यालय का क्या हुआ? क्या उसका कोई वजुद है? अगर है, तो कहाँ है?

पूर्व में जिक्र की गई विद्यालय के अलावा शहर मेें इस तरह के कुछ और विद्यालय हैं, जो आज अपनी जगह पर दिखाई नहीं पड़ती है। उन्हीं उदाहरणों में से पटवा टोली बम रोड का प्राथमिक विद्यालय तथा कसेरा टोली स्थित प्राथमिक विद्यालय भी है। पूर्व में मौलाबाग अवस्थित हरिजन होस्टल का जो विद्यालय था, वो अब तरार ट्रेनिंग कॉलेज के पास चला गया। और वह आज भी मौलाबाग मध्य विद्यालय के नाम से जाना जाता है, जो कि शहर से पाँच किलोमीटर दूर तरार पंचायत में है। दूसरा पटवा टोली बम रोड का प्राथमिक विद्यालय, जो अब मध्य विद्यालय संख्या 2 में चलता है। तथा एक अन्य कसेरा टोली प्राथमिक विद्यालय, जो अब मध्य विद्यालय संख्या 1 में चलता है।

जानने की कोशिश करने पर मालूम होता है कि इन सब की वजह सिर्फ खुद का जमीन न होना है। शहर और उसके आस-पास बहुत से विद्यालय जमीन के अभाव में दूसरे जगह शिफ्ट कर दी गई है। जरूरत है ऐसे विद्यालय के लिए जमीन तलाश कर स्थापित करने की। परंतु सवाल है कि इसकी शुरूआत कौन करें? और कैसे करें?

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